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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Nabi-nabi Kisah-kisah para rasul Nabi Musa AS Qarun Qarun ditenggelamkan ke dalam perut bumi

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कुल आयत : 3
81
Q.S अल-कासास (28:81)

فَخَسَفْنَا بِهٖ وَبِدَارِهِ الْاَرْضَ ۗفَمَا كَانَ لَهٗ مِنْ فِئَةٍ يَّنْصُرُوْنَهٗ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ ۖوَمَا كَانَ مِنَ الْمُنْتَصِرِيْنَ

fakhasafnā bihī wa bidārihil-arḍ(a), famā kāna lahū min fi'atiy yanṣurūnahū min dūnillāh(i), wa mā kāna minal-muntaṣirīn(a).

त हम हुनका (करुण) आ हुनकर घर के धरती पर फेकि देलियनि, आ हुनका लग अल्लाह के अलावा हुनकर मदद करय वाला कियो नहि छल, आ ओ ओहि मे सं नहि छलाह जे अपन बचाव क सकैत छलाह.


82
Q.S अल-कासास (28:82)

وَاَصْبَحَ الَّذِيْنَ تَمَنَّوْا مَكَانَهٗ بِالْاَمْسِ يَقُوْلُوْنَ وَيْكَاَنَّ اللّٰهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَّشَاۤءُ مِنْ عِبَادِهٖ وَيَقْدِرُۚ لَوْلَآ اَنْ مَّنَّ اللّٰهُ عَلَيْنَا لَخَسَفَ بِنَا ۗوَيْكَاَنَّهٗ لَا يُفْلِحُ الْكٰفِرُوْنَ ࣖ

wa aṣbaḥal-lażīna tamannau makānahū bil-amsi yaqūlūna waika'annallāha yabsuṭur-rizqa limay yasyā'u min ‘ibādihī wa yaqdir(u), lau lā am mannallāhu ‘alainā lakhasafa binā, waika'annahū lā yufliḥul-kāfirūn(a).

आ जे लोक काल्हि अपन स्थिति (करुण) के कल्पना केने छलाह ओ कहलनि, "अफसोस, ई सत्य अछि जे अल्लाह अपन सेवक मे जिनका चाहथि तकरा रोजी-रोटी बढ़बैत छथि आ सीमा (जिनका लेल ओ अपन सेवक मे चाहैत छथि)। जँ अल्लाह हमरा सभ पर अपन इनाम नहि देने रहितथि त निश्चित रूप सँ ओ हमरा सभ केँ सेहो दफना देने रहितथि। अफसोस, ई सत्य अछि जे जे (अल्लाह केर एहसान) केँ नकारैत छथि, ओ नहि रहताह।" भाग्यशाली।"


40
Q.S अल-'अंकबुत (29:40)

فَكُلًّا اَخَذْنَا بِذَنْۢبِهٖۙ فَمِنْهُمْ مَّنْ اَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا ۚوَمِنْهُمْ مَّنْ اَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ ۚوَمِنْهُمْ مَّنْ خَسَفْنَا بِهِ الْاَرْضَۚ وَمِنْهُمْ مَّنْ اَغْرَقْنَاۚ وَمَا كَانَ اللّٰهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلٰكِنْ كَانُوْٓا اَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُوْنَ

fakullan akhażnā biżambih(ī), faminhum man arsalnā ‘alaihi ḥāṣibā(n), wa minhum man akhażathuṣ-ṣaiḥah(tu), wa minhum man khasafnā bihil-arḍ(a), wa minhum man agraqnā, wa mā kānallāhu liyaẓlimahum wa lākin kānū anfusahum yaẓlimūn(a).

तेँ हम सभ (ओकरा सभ मे सँ) प्रत्येक केँ ओकर पापक सजा देलियैक, किछु गोटे पर कंकड़क बौछार फेकि देलियैक, किछु गोटे केँ जोर-जोर सँ गरजैत आवाज सँ मारल गेल, किछु केँ हम सब धरती मे डूबि गेलहुँ, आ किछु केँ हम सब डूबि गेलहुँ। अल्लाह हुनका सब पर अन्याय बिल्कुल नै करय चाहैत छथि, मुदा ओ सब छथि जे अपना पर अन्याय केने छथि।