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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - पिछले राष्ट्र नबियों प्रेरितों की कहानियाँ पैगंबर यीशु ए.एस पैगंबर यीशु ने तब बात की थी जब वह अभी भी बच्चे थे

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कुल श्लोक : 7
46
Q.S अली इमरान (3:46)

وَيُكَلِّمُ النَّاسَ فِى الْمَهْدِ وَكَهْلًا وَّمِنَ الصّٰلِحِيْنَ

wa yukallimun nāsa fil-mahdi wa kahlaw wa minaṣ-ṣāliḥīn(a).

और वह लोगों से (बचपन में) पालने में और बड़े होने पर बात करेगा, और वह नेक लोगों में से होगा।'


110
Q.S अल-मैदाह (5:110)

اِذْ قَالَ اللّٰهُ يٰعِيْسَى ابْنَ مَرْيَمَ اذْكُرْ نِعْمَتِيْ عَلَيْكَ وَعَلٰى وَالِدَتِكَ ۘاِذْ اَيَّدْتُّكَ بِرُوْحِ الْقُدُسِۗ تُكَلِّمُ النَّاسَ فِى الْمَهْدِ وَكَهْلًا ۚوَاِذْ عَلَّمْتُكَ الْكِتٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرٰىةَ وَالْاِنْجِيْلَ ۚوَاِذْ تَخْلُقُ مِنَ الطِّيْنِ كَهَيْـَٔةِ الطَّيْرِ بِاِذْنِيْ فَتَنْفُخُ فِيْهَا فَتَكُوْنُ طَيْرًاۢ بِاِذْنِيْ وَتُبْرِئُ الْاَكْمَهَ وَالْاَبْرَصَ بِاِذْنِيْ ۚوَاِذْ تُخْرِجُ الْمَوْتٰى بِاِذْنِيْ ۚوَاِذْ كَفَفْتُ بَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ عَنْكَ اِذْ جِئْتَهُمْ بِالْبَيِّنٰتِ فَقَالَ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْهُمْ اِنْ هٰذَآ اِلَّا سِحْرٌ مُّبِيْنٌ

iż qālallāhu yā ‘īsabna maryamażkur ni‘matī ‘alaika wa ‘alā wālidatik(a), iż ayyattuka birūḥil-qudus(i), tukallimun-nāsa fil-mahdi wa kahlā(n), wa iż ‘allamtukal-kitāba wal-ḥikmata wat-taurāta wal-injīl(a), wa iż takhluqu minaṭ-ṭīni kahai'atiṭ-ṭairi bi'iżnī fa tanfukhu fīhā fa takūnu ṭairam bi'iżnī wa tubri'ul-akmaha wal-abraṣa bi'iżnī, wa iż tukhrijul-mautā bi'iżnī, wa iż kafaftu banī isrā'īla ‘anka iż ji'tahum bil-bayyināti fa qālal-lażīna kafarū minhum in hāżā illā siḥrum mubīn(un).

और (याद करो) जब अल्लाह ने कहा, 'ऐ ईसा इब्न मरयम! मेरी उस नेअमत को याद कर जो तुझ पर और तेरी माँ पर हुई, जब मैंने तुझे रूहुल क़ुद्स से ताक़त दी। तू लोगों से पालने में और बड़े होने पर बात करता था। और (याद कर) जब मैंने तुझे लिखना, हिकमत, तौरात और इंजील सिखाई। और (याद कर) जब तू मेरी इजाज़त से मिट्टी से परिंदे की शक्ल बनाता था, फिर उसमें फूँक मारता था, तो वह मेरी इजाज़त से परिंदा बन जाता था। और (याद कर) जब तू मेरी इजाज़त से जन्म के अंधे और कोढ़ी को ठीक करता था। और (याद कर) जब तू मेरी इजाज़त से मुर्दों को (क़ब्र से ज़िंदा) निकालता था। और (याद कर) जब मैंने बनी इसराइल को तुझ पर हमला करने से रोका, जब तू उनके पास साफ़ दलीलें लेकर आया, तो उनमें से काफ़िरों ने कहा, 'यह तो बस साफ़ जादू है।'


29
Q.S मरयम (19:29)

فَاَشَارَتْ اِلَيْهِۗ قَالُوْا كَيْفَ نُكَلِّمُ مَنْ كَانَ فِى الْمَهْدِ صَبِيًّا

fa asyārat ilaīh(i), qālū kaifa nukallimu man kāna fil-mahdi ṣabiyyā(n).

तो उसने (मरयम ने) अपने बेटे की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा, 'हम उस बच्चे से कैसे बात करें जो अभी पालने में है?'


30
Q.S मरयम (19:30)

قَالَ اِنِّيْ عَبْدُ اللّٰهِ ۗاٰتٰنِيَ الْكِتٰبَ وَجَعَلَنِيْ نَبِيًّا ۙ

qāla innī ‘abdullāh(i), ātāniyal-kitāba wa ja‘alanī nabiyyā(n).

उसने (ईसा ने) कहा, 'मैं अल्लाह का बन्दा हूँ, उसने मुझे किताब (इंजील) दी और मुझे नबी बनाया।'


31
Q.S मरयम (19:31)

وَّجَعَلَنِيْ مُبٰرَكًا اَيْنَ مَا كُنْتُۖ وَاَوْصٰنِيْ بِالصَّلٰوةِ وَالزَّكٰوةِ مَا دُمْتُ حَيًّا ۖ

wa ja‘alanī mubārakan aina mā kunt(u), wa auṣānī biṣ-ṣalāti waz-zakāti mā dumtu ḥayyā(n).

और उसने मुझे बरकत वाला बनाया, चाहे मैं कहीं भी रहूँ, और उसने मुझे नमाज़ और ज़कात का हुक्म दिया जब तक मैं ज़िन्दा हूँ।


32
Q.S मरयम (19:32)

وَّبَرًّاۢ بِوَالِدَتِيْ وَلَمْ يَجْعَلْنِيْ جَبَّارًا شَقِيًّا

wa barram biwālidatī wa lam yaj‘alnī jabbāran syaqiyyā(n).

और अपने माता-पिता के साथ नेकी करने वाला (बनाया), और मुझे न घमंडी बनाया और न नाफरमान।


33
Q.S मरयम (19:33)

وَالسَّلٰمُ عَلَيَّ يَوْمَ وُلِدْتُّ وَيَوْمَ اَمُوْتُ وَيَوْمَ اُبْعَثُ حَيًّا

was-salāmu ‘alayya yauma wulittu wa yauma amūtu wa yauma ub‘aṡu ḥayyā(n).

और मुझ पर सलामती हो जिस दिन मैं पैदा हुआ, जिस दिन मैं मरूँगा, और जिस दिन मैं दोबारा ज़िन्दा किया जाऊँगा।