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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Shalat Waktu shalat Penentuan waktu shalat

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कुल आयत : 2
78
Q.S अल-इसरा के ह (17:78)

اَقِمِ الصَّلٰوةَ لِدُلُوْكِ الشَّمْسِ اِلٰى غَسَقِ الَّيْلِ وَقُرْاٰنَ الْفَجْرِۗ اِنَّ قُرْاٰنَ الْفَجْرِ كَانَ مَشْهُوْدًا

aqimiṣ-ṣalāta lidulūkisy-syamsi ilā gasaqil-laili wa qur'ānal-fajr(i), inna qur'ānal-fajri kāna masyhūdā(n).

सूरज डूबे के पल से लेके रात के अन्हार तक नमाज करीं आ (फजर के नमाज भी करीं)। दरअसल, सुबह के नमाज के गवाह (फरिश्ता लोग) रहे।


130
Q.S ता-हा के बा (20:130)

فَاصْبِرْ عَلٰى مَا يَقُوْلُوْنَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوْعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوْبِهَا ۚوَمِنْ اٰنَاۤئِ الَّيْلِ فَسَبِّحْ وَاَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضٰى

faṣbir ‘alā mā yaqūlūna wa sabbiḥ biḥamdi rabbika qabla ṭulū‘isy-syamsi wa qabla gurūbihā, wa min ānā'il-laili fa sabbiḥ wa aṭrāfan-nahāri la‘allaka tarḍā.

त ओह लोग के बात पर धैर्य राखीं आ सूरज के उगला से पहिले आ डूबे से पहिले अपना प्रभु के स्तुति क के अपना के महिमामंडन करीं; आ आधा रात आ दिन के अंत में प्रार्थना (उहो) ताकि रउरा शांत महसूस करीं।