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Q.S अन-निसा के बा (4:86)
وَاِذَا حُيِّيْتُمْ بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوْا بِاَحْسَنَ مِنْهَآ اَوْ رُدُّوْهَا ۗ اِنَّ اللّٰهَ كَانَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ حَسِيْبًا
wa iżā ḥuyyītum bitaḥiyyatin fa ḥayyū bi'aḥsana minhā au ruddūhā, innallāha kāna ‘alā kulli syai'in ḥasībā(n).
आ अगर रउरा के (अभिवादन) सम्मान से सम्मानित कइल जाला त ओह सम्मान के बेहतर के साथे वापस कर दीं, भा ओकरा साथे (आदर, जवन अनुपात में बा) वापस कर दीं. सचमुच अल्लाह हर बात के ध्यान में राखेले।
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Q.S अध-धारियत के बा (51:25)
اِذْ دَخَلُوْا عَلَيْهِ فَقَالُوْا سَلٰمًا ۗقَالَ سَلٰمٌۚ قَوْمٌ مُّنْكَرُوْنَ
iż dakhalū ‘alaihi fa qālū salāmā(n), qāla salām(un), qaumum munkarūn(a).
(याद रखीं) जब उ लोग उनकरा जगह में घुस के कहले, “सलमान” (नमस्कार) त अब्राहम कहले, “सलामून” (नमस्कार)। (उ लोग) अइसन लोग रहे जेकरा के उ ना जानत रहले।