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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Jihad Hukum berjihad Kewajiban berjihad Asal usul diwajibkannya berjihad

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20
Q.S मुहम्मद (47:20)

وَيَقُوْلُ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَوْلَا نُزِّلَتْ سُوْرَةٌ ۚفَاِذَآ اُنْزِلَتْ سُوْرَةٌ مُّحْكَمَةٌ وَّذُكِرَ فِيْهَا الْقِتَالُ ۙرَاَيْتَ الَّذِيْنَ فِيْ قُلُوْبِهِمْ مَّرَضٌ يَّنْظُرُوْنَ اِلَيْكَ نَظَرَ الْمَغْشِيِّ عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِۗ فَاَوْلٰى لَهُمْۚ

wa yaqūlul-ażīna āmanū lau lā nuzzilat sūrah(tun), fa iżā unzilat sūratum muḥkamatuw wa żukira fīhal-itāl(u), ra'aital-ażīna fī qulūbihim maraḍuy yanẓurūna ilaika naẓaral-magsyiyyi ‘alaihi minal-maut(i), fa'aulā lahum.

आरू जे विश्वास करै छै, वू कहै छै, "कोय सूरह (जिहाद के हुक्म के संबंध में) कियैक नै प्रकट होय गेलै?" अस्तु, जँ कोनो सूरह नीचाँ पठाओल जाय जकर स्पष्ट अर्थ हो आ ओहि मे युद्ध (आज्ञा) हो त' देखब जे जिनकर हृदय मे रोग अछि ओ लोक अहाँ केँ ओहिना देखत जेना कियो बेहोश भ' गेल हो, कारण ओ मृत्यु सँ डरैत अछि। मुदा हुनका सभक लेल ई बेसी उपयुक्त अछि।


21
Q.S मुहम्मद (47:21)

طَاعَةٌ وَّقَوْلٌ مَّعْرُوْفٌۗ فَاِذَا عَزَمَ الْاَمْرُۗ فَلَوْ صَدَقُوا اللّٰهَ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُمْۚ

°ā‘atuw wa qaulum ma‘rūf(un), fa'iżā ‘azamal-amr(u), falau ṣadaqullāha lakāna khairal lahum.

(हुनका सब लेल जे नीक अछि ओ अछि) (अल्लाह के) आज्ञाकारी रहब आ नीक बात बजब। कारण जँ (युद्धक) क्रम स्थापित भ' जायत (ओकरा सभ केँ नीक नहि लागत)। ओना जँ ओ सभ सचमुच अल्लाह पर (विश्वास) करितथि तँ हुनका सभक लेल से नीक रहैत।