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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - जिहाद समझौता शांति बहुदेववादियों के साथ शांति संधि

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कुल श्लोक : 3
61
Q.S अल Anfal (8:61)

۞ وَاِنْ جَنَحُوْا لِلسَّلْمِ فَاجْنَحْ لَهَا وَتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ ۗاِنَّهٗ هُوَ السَّمِيْعُ الْعَلِيْمُ

wa in janaḥū lis-salmi fajnaḥ lahā wa tawakkal ‘alallāh(i), innahū huwas-samī‘ul-‘alīm(u).

लेकिन यदि वे (काफ़िर) शांति की ओर झुकें, तो तुम भी उसे स्वीकार करो और अल्लाह पर भरोसा रखो। निश्चय ही, वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।


4
Q.S एट-तौबाह (9:4)

اِلَّا الَّذِيْنَ عَاهَدْتُّمْ مِّنَ الْمُشْرِكِيْنَ ثُمَّ لَمْ يَنْقُصُوْكُمْ شَيْـًٔا وَّلَمْ يُظَاهِرُوْا عَلَيْكُمْ اَحَدًا فَاَتِمُّوْٓا اِلَيْهِمْ عَهْدَهُمْ اِلٰى مُدَّتِهِمْۗ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُتَّقِيْنَ

illal-lażīna ‘āhattum minal-musyrikīna ṡumma lam yanquṣūkum syai'aw wa lam yuẓāhirū ‘alaikum aḥadan fa atimmū ilaihim ‘ahdahum ilā muddatihim, innallāha yuḥibbul-muttaqīn(a).

सिवाय उन मुश्रिकों के जिनके साथ तुमने संधि की थी और उन्होंने (संधि के) किसी भी हिस्से को कम नहीं किया और न ही तुम्हारे खिलाफ़ किसी की सहायता की, तो उनके साथ उनकी संधि को उसके निर्धारित समय तक पूरा करो। निश्चय ही अल्लाह तक़वा रखने वालों से प्रेम करता है।


8
Q.S एट-तौबाह (9:8)

كَيْفَ وَاِنْ يَّظْهَرُوْا عَلَيْكُمْ لَا يَرْقُبُوْا فِيْكُمْ اِلًّا وَّلَا ذِمَّةً ۗيُرْضُوْنَكُمْ بِاَفْوَاهِهِمْ وَتَأْبٰى قُلُوْبُهُمْۚ وَاَكْثَرُهُمْ فٰسِقُوْنَۚ

kaifa wa iy yaẓharū ‘alaikum lā yarqubū fīkum illaw wa lā żimmah(tan), yurḍūnakum bi'afwāhihim wa ta'bā qulūbuhum, wa akṡaruhum fāsiqūn(a).

(संधि कैसे हो सकती है) जबकि यदि वे तुम पर विजय प्राप्त कर लें, तो वे न तो तुम्हारे साथ रिश्तेदारी का ध्यान रखते हैं और न ही संधि का। वे अपने मुँह से तुम्हें प्रसन्न करते हैं, लेकिन उनके दिल इन्कार करते हैं। उनमें से अधिकांश लोग फ़ासिक (वचन तोड़ने वाले) हैं।