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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Jihad Fase-fase pertempuran Hasil-hasil perang Jizyah (upeti)

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29
Q.S अत-तौबाह (9:29)

قَاتِلُوا الَّذِيْنَ لَا يُؤْمِنُوْنَ بِاللّٰهِ وَلَا بِالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَلَا يُحَرِّمُوْنَ مَا حَرَّمَ اللّٰهُ وَرَسُوْلُهٗ وَلَا يَدِيْنُوْنَ دِيْنَ الْحَقِّ مِنَ الَّذِيْنَ اُوْتُوا الْكِتٰبَ حَتّٰى يُعْطُوا الْجِزْيَةَ عَنْ يَّدٍ وَّهُمْ صٰغِرُوْنَ ࣖ

qātilul-lażīna lā yu'minūna billāhi wa lā bil-yaumil-ākhiri wa lā yuḥarrimūna mā ḥarramallāhu wa rasūluhū wa lā yadīnūna dīnal-ḥaqqi minal-lażīna ūtul-kitāba ḥattā yu‘ṭul-jizyata ‘ay yadiw wa hum ṣāgirūn(a).

जे अल्लाह आ अंतिम दिन पर विश्वास नहि करैत छथि, जे अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह द्वारा मना कयल गेल बात केँ मना नहि करैत छथि आ जे सच्चा धर्म (अल्लाह केर धर्म) मे विश्वास नहि करैत छथि, (अर्थात लोक) जिनका किताब देल गेल अछि, ताहि सँ लड़ू, जाबत धरि ओ सब अधीनताक अवस्था मे रहैत आज्ञाकारी रूप सँ जिजिया (कर) नहि देत।