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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - जिहाद लड़ाई के चरण युद्ध की नैतिकता तरह तरह से जवाब दें

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कुल श्लोक : 3
126
Q.S एक Nahl (16:126)

وَاِنْ عَاقَبْتُمْ فَعَاقِبُوْا بِمِثْلِ مَا عُوْقِبْتُمْ بِهٖۗ وَلَىِٕنْ صَبَرْتُمْ لَهُوَ خَيْرٌ لِّلصّٰبِرِيْنَ

wa in ‘āqabtum fa ‘āqibū bimiṡli mā ‘ūqibtum bih(ī), wa la'in ṣabartum lahuwa khairul liṣ-ṣābirīn(a).

और अगर तुम सजा देते हो, तो वैसी ही सजा दो जैसी तुम्हें दी गई, लेकिन अगर तुम सब्र करो, तो यह सब्र करने वालों के लिए बेहतर है।


60
Q.S अल हज (22:60)

۞ ذٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوْقِبَ بِهٖ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيْهِ لَيَنْصُرَنَّهُ اللّٰهُ ۗاِنَّ اللّٰهَ لَعَفُوٌّ غَفُوْرٌ

Żālika wa man ‘āqaba bimiṡli mā ‘ūqiba bihī ṡumma bugiya ‘alaihi layanṣurannahullāh(u), innallāha la‘afuwwun gafūr(un).

ऐसा ही है, और जो कोई उस ज़ुल्म के बराबर बदला लेता है जो उसने सहा, फिर उस पर फिर ज़ुल्म किया जाता है, तो निश्चित रूप से अल्लाह उसकी मदद करेगा। निश्चित रूप से, अल्लाह बहुत माफ करने वाला, बहुत बख्शने वाला है।


40
Q.S राख शूरा (42:40)

وَجَزٰۤؤُا سَيِّئَةٍ سَيِّئَةٌ مِّثْلُهَا ۚفَمَنْ عَفَا وَاَصْلَحَ فَاَجْرُهٗ عَلَى اللّٰهِ ۗاِنَّهٗ لَا يُحِبُّ الظّٰلِمِيْنَ

wa jazā'u sayyi'atin sayyi'atum miṡluhā, faman ‘afā wa aṣlaḥa fa ajruhū ‘alallāh(i), innahū lā yuḥibbuẓ-ẓālimīn(a).

और बुराई का बदला उसी तरह की बुराई है, लेकिन जो माफ़ कर दे और इस्लाह करे, तो उसका अज्र अल्लाह के ज़िम्मे है। निश्चय ही, वह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता।