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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - अल-कुरान कुरान में कहानियाँ और दृष्टान्त कुरान से कहानियाँ मरियम और कुरान की कहानी मैरी का जन्म

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कुल श्लोक : 1
36
Q.S अली इमरान (3:36)

فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ اِنِّيْ وَضَعْتُهَآ اُنْثٰىۗ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْۗ وَلَيْسَ الذَّكَرُ كَالْاُنْثٰى ۚ وَاِنِّيْ سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَاِنِّيْٓ اُعِيْذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ الشَّيْطٰنِ الرَّجِيْمِ

falammā waḍa‘athā qālat rabbi innī waḍa‘tuhā unṡā, wallāhu a‘lamu bimā waḍa‘at, wa laisaż-żakaru kal-unṡā, wa innī sammaituhā maryama wa innī u‘īżuhā bika wa żurriyyatahā minasy-syaiṭānir-rajīm(i).

जब उसने उसे जन्म दिया, तो उसने कहा, 'मेरे रब, मैंने एक लड़की को जन्म दिया है।' और अल्लाह अच्छी तरह जानता था कि उसने क्या जन्म दिया, और नर बच्चा वैसा नहीं है जैसा मादा बच्चा। 'और मैंने उसका नाम मरयम रखा, और मैं उसकी और उसकी संतान की शरण माँगता हूँ तुझसे शैतान के (प्रभाव) से।'