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Q.S एन-नहल के बा (16:112)
وَضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ اٰمِنَةً مُّطْمَىِٕنَّةً يَّأْتِيْهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِّنْ كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِاَنْعُمِ اللّٰهِ فَاَذَاقَهَا اللّٰهُ لِبَاسَ الْجُوْعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوْا يَصْنَعُوْنَ
wa ḍaraballāhu maṡalan qaryatan kānat āminatam muṭma'innatay ya'tīhā rizquhā ragadam min kulli makānin fa kafarat bi'an‘umillāhi fa ażāqahallāhu libāsal-jū‘i wal-khaufi bimā kānū yaṣna‘ūn(a).
आ अल्लाह एगो उदाहरण (के) एगो अइसन भूमि बनवले बाड़न जवन पहिले सुरक्षित आ शांतिपूर्ण रहे, ओकरा लगे हर जगह से रोजी-रूट्टी भरपूर आवत रहे, बाकिर ओकर (निवासी) अल्लाह के बरकत से इनकार करत रहले, एहसे अल्लाह ओह लोग पर भूख आ डर के आपदा डाल दिहले, काहे कि ऊ लोग जवन कइले रहे.