وَنَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ اِبْرٰهِيْمَۘ
wa nabbi'hum ‘an ḍaifi ibrāhīm(a).
अर (मुहम्मद) नै इब्राहिम रै मेहमान (दूत) रै बारै में बताओ।
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ اَيُّهَا الْمُرْسَلُوْنَ
qāla famā khaṭbukum ayyuhal-mursalūn(a).
उण (इब्राहिम) कह्यो, “हे दूतों, थारो कांई जरूरी काम है?”
هَلْ اَتٰىكَ حَدِيْثُ ضَيْفِ اِبْرٰهِيْمَ الْمُكْرَمِيْنَۘ
hal atāka ḥadīṡu ḍaifi ibrāhīmal-mukramīn(a).
कांई इब्राहिम (देवदूत) रै मेहमानां री कहाणी थारै (मुहम्मद) तांई पूगगी है जिका महिमामंडित हुया हा?
اِذْ دَخَلُوْا عَلَيْهِ فَقَالُوْا سَلٰمًا ۗقَالَ سَلٰمٌۚ قَوْمٌ مُّنْكَرُوْنَ
iż dakhalū ‘alaihi fa qālū salāmā(n), qāla salām(un), qaumum munkarūn(a).
(याद राखजो) जद वे उणरी जगां मांय दाखिल हुया अर "सलामान" (नमस्कार) कह्यो, तो इब्राहिम जवाब दियो, "सलामुन" (नमस्कार)। (वे) लोग हा जिणनै वो नीं जाणतो हो।
فَرَاغَ اِلٰٓى اَهْلِهٖ فَجَاۤءَ بِعِجْلٍ سَمِيْنٍۙ
farāga ilā ahlihī fa jā'a bi‘ijlin samīn(in).
तो वो (इब्राहिम) आपरै परिवार सूं मिलबा नै चुपचाप गयो, फेर उणरै वास्तै एक मोटो (जळ्योड़ो) बछड़ो रो मांस ल्यायो,
فَقَرَّبَهٗٓ اِلَيْهِمْۚ قَالَ اَلَا تَأْكُلُوْنَ
fa qarrabahū ilaihim, qāla alā ta'kulūn(a).
फेर बो बांनै परोस दियो (पण बां खाणो कोनी चायो)। इब्राहिम बोल्यो, “थै क्यूं कोनी खावो।”