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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Al-Qur'an Turunnya Al-Qur'an Beberapa orang yang menjadi sebab turunnya ayat Al Qur'an Ayat yang berhubungan dengan Al Walid bin Al Mughirah

आयत खोज परिणाम :
कुल आयत : 29
90
Q.S अल-इसरा के ह (17:90)

وَقَالُوْا لَنْ نُّؤْمِنَ لَكَ حَتّٰى تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْاَرْضِ يَنْۢبُوْعًاۙ

wa qālū lan nu'mina laka ḥattā tafjura lanā minal-arḍi yambū‘ā(n).

आ ऊ लोग कहल कि जबले तू धरती से हमनी खातिर पानी के झरना ना भेजब तबले हम तोहरा (मुहम्मद) पर विश्वास ना करब,


91
Q.S अल-इसरा के ह (17:91)

اَوْ تَكُوْنَ لَكَ جَنَّةٌ مِّنْ نَّخِيْلٍ وَّعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْاَنْهٰرَ خِلٰلَهَا تَفْجِيْرًاۙ

au takūna laka jannatum min nakhīliw wa ‘inabin fa tufajjiral-anhāra khilālahā tafjīrā(n).

भा रउरा लगे खजूर आ अंगूर के बगइचा बा, तब रउरा ओकरा से तेज बहत नदी के बहे देत बानी,


92
Q.S अल-इसरा के ह (17:92)

اَوْ تُسْقِطَ السَّمَاۤءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا اَوْ تَأْتِيَ بِاللّٰهِ وَالْمَلٰۤىِٕكَةِ قَبِيْلًاۙ

au tusqiṭas-samā'a kamā za‘amta ‘alainā kisafan au ta'tiya billāhi wal-malā'ikati qabīlā(n).

या तू हमनी प आसमान के टुकड़ा-टुकड़ा में गिरा देब, जईसे कि आप कहतानी, चाहे (पहिले) आप अल्लाह अवुरी फरिश्ता के हमनी से आमने-सामने ले आईब,


93
Q.S अल-इसरा के ह (17:93)

اَوْ يَكُوْنَ لَكَ بَيْتٌ مِّنْ زُخْرُفٍ اَوْ تَرْقٰى فِى السَّمَاۤءِ ۗوَلَنْ نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتّٰى تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتٰبًا نَّقْرَؤُهٗۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّيْ هَلْ كُنْتُ اِلَّا بَشَرًا رَّسُوْلًا ࣖ

au yakūna laka baitum min zukhrufin au tarqā fis-samā'(i), wa lan nu'mina liruqiyyika ḥattā tunazzila ‘alainā kitāban naqra'uh(ū), qul subḥāna rabbī hal kuntu illā basyarar rasūlā(n).

या तोहरा सोना के घर (बनावल) बा, ना त तू स्वर्ग में चढ़त बाड़ू। आ जबले तू हमनी के पढ़े खातिर एगो किताब ना भेजब तबले हमनी के तोहरा स्वर्गारोहण पर विश्वास ना करब जा।" कह (मुहम्मद) "हमार रब के महिमा होखे, का हम खाली एगो इंसान ना हईं जे दूत हईं?"


18
Q.S अस-सजदाह के बा (32:18)

اَفَمَنْ كَانَ مُؤْمِنًا كَمَنْ كَانَ فَاسِقًاۗ لَا يَسْتَوٗنَ

afaman kāna mu'minan kaman kāna fāsiqā(n), lā yastawūn(a).

त का विश्वासी दुष्ट लोग (अविश्वासी) निहन बाड़े? उ लोग एके जइसन नइखन।


6
Q.S अल-हुजुरात के ह (49:6)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اِنْ جَاۤءَكُمْ فَاسِقٌۢ بِنَبَاٍ فَتَبَيَّنُوْٓا اَنْ تُصِيْبُوْا قَوْمًاۢ بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوْا عَلٰى مَا فَعَلْتُمْ نٰدِمِيْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanū in jā'akum fāsiqum binaba'in fa tabayyanū an tuṣībū qaumam bijahālatin fa tuṣbiḥū ‘alā mā fa‘altum nādimīn(a).

हे विश्वास करे वाला लोग! अगर कवनो दुष्ट आदमी कवनो खबर लेके रउरा लगे आवे त ओकर सच्चाई के पता लगा लीं कि कहीं अज्ञानता से कवनो लोग के नुकसान मत पहुँचा दीं आ फेर अपना कइल काम खातिर पछतावा मत हो जाईं.


7
Q.S अल-हुजुरात के ह (49:7)

وَاعْلَمُوْٓا اَنَّ فِيْكُمْ رَسُوْلَ اللّٰهِ ۗ لَوْ يُطِيْعُكُمْ فِيْ كَثِيْرٍ مِّنَ الْاَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ حَبَّبَ اِلَيْكُمُ الْاِيْمَانَ وَزَيَّنَهٗ فِيْ قُلُوْبِكُمْ وَكَرَّهَ اِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوْقَ وَالْعِصْيَانَ ۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الرّٰشِدُوْنَۙ

wa‘lamū anna fīkum rasūlallāh(i), lau yuṭī‘ukum fī kaṡīrim minal-amri la‘anittum wa lākinnallāha ḥabbaba ilaikumul-īmāna wa zayyanahū fī qulūbikum wa karraha ilaikumul-kufra wal-fusūqa wal-‘iṣyān(a), ulā'ika humur-rāsyidūn(a).

अउर जान लीं कि तोहनी में अल्लाह के रसूलुल्लाह भी बाड़े। अगर उ बहुत बात में तोहार बात मानले रहित त तू परेशानी में पड़ गईल रहित। लेकिन अल्लाह तोहनी के इमान से प्रेम करवले बाड़े अवुरी आपके दिल में सुंदर बना देले बाड़े अवुरी कुफर, बुराई अवुरी अवज्ञा से नफरत करेवाला बना देले बाड़े। इहे लोग सीधा रास्ता प चलेले।


33
Q.S अन-नजम के बा (53:33)

اَفَرَءَيْتَ الَّذِيْ تَوَلّٰىۙ

afa ra'aital-lażī tawallā.

त का रउवा अइसन लोग के नईखी देखत जे (कुरान से) मुड़ जाला?


34
Q.S अन-नजम के बा (53:34)

وَاَعْطٰى قَلِيْلًا وَّاَكْدٰى

wa a‘ṭā qalīlaw wa akdā.

आ ऊ तनी-मनी (जवन वादा कइल गइल रहे) देला आ बाकी के रोक देला।


35
Q.S अन-नजम के बा (53:35)

اَعِنْدَهٗ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرٰى

a‘indahū ‘ilmul-gaibi fahuwa yarā.

का ओकरा अदृश्य के ज्ञान बा ताकि ऊ (ओकरा) देख सके?


36
Q.S अन-नजम के बा (53:36)

اَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِيْ صُحُفِ مُوْسٰى

am lam yunabba' bimā fī ṣuḥufi mūsā.

या का इ (उनका) के रिपोर्ट नइखे कइल गइल कि (पवित्र किताब जवन मूसा के सामने प्रकट भइल रहे) के पन्ना में का बा?


11
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:11)

ذَرْنِيْ وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيْدًاۙ

Żarnī wa man khalaqtu waḥīdā(n).

जवना के हम खुद बनवले बानी ओकरा प्रति हमरा (अभिनय) करे दीं,


12
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:12)

وَّجَعَلْتُ لَهٗ مَالًا مَّمْدُوْدًاۙ

wa ja‘altu lahū mālam mamdūdā(n).

आ हम तोहरा के भरपूर धन देत बानी,


13
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:13)

وَّبَنِيْنَ شُهُوْدًاۙ

wa banīna syuhūdā(n).

आ जवन लइका हमेशा ओकरा साथे रहेला,


14
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:14)

وَّمَهَّدْتُّ لَهٗ تَمْهِيْدًاۙ

wa mahhattu lahū tamhīdā(n).

आ हम रउरा के (जीवन के) सबसे व्यापक संभव जगह देत बानी.


15
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:15)

ثُمَّ يَطْمَعُ اَنْ اَزِيْدَۙ

Ṡumma yaṭma‘u an azīd(a).

तब ऊ बहुते चाहत रहले कि हम एहमें अउरी कुछ जोड़ दीं.


16
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:16)

كَلَّاۗ اِنَّهٗ كَانَ لِاٰيٰتِنَا عَنِيْدًاۗ

kallā, innahū kāna li'āyātinā ‘anīdā(n).

नईखी सकत! सचमुच उ हमनी के आयत (कुरान) के विरोध कईले बाड़े।


17
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:17)

سَاُرْهِقُهٗ صَعُوْدًاۗ

sa'urhiquhū ṣa‘ūdā(n).

हम ओकरा पर एगो थकाऊ चढ़ाई के बोझ डाल देब।


18
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:18)

اِنَّهٗ فَكَّرَ وَقَدَّرَۙ

innahū fakkara wa qaddar(a).

सचमुच, उ (उ जवन तय कईले) के बारे में सोचले बाड़े अवुरी तय कईले बाड़े,


19
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:19)

فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَۙ

faqutila kaifa qaddar(a).

तब ओकरा पर धिक्कार बा! ऊ कइसे तय करेला?


20
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:20)

ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَۙ

Ṡumma qutila kaifa qaddar(a).

फेरु ओकरा पर धिक्कार बा! ऊ कइसे तय करेला?


21
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:21)

ثُمَّ نَظَرَۙ

Ṡumma naẓar(a).

तब ऊ (चिंतन कइलन) सोचलसि कि


22
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:22)

ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَۙ

Ṡumma ‘abasa wa basar(a).

फेर खट्टा आ उदास चेहरा से,


23
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:23)

ثُمَّ اَدْبَرَ وَاسْتَكْبَرَۙ

Ṡumma adbara wastakbar(a).

तब (सच्चाई से) मुड़ के बड़ाई कइलन,


24
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:24)

فَقَالَ اِنْ هٰذَآ اِلَّا سِحْرٌ يُّؤْثَرُۙ

faqāla in hāżā illā siḥruy yu'ṡar(u).

तब उ कहले कि, “ई (कुरान) सिर्फ जादू ह जवन (पुरान लोग से) सीखल गईल बा।


25
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:25)

اِنْ هٰذَآ اِلَّا قَوْلُ الْبَشَرِۗ

in hāżā illā qaulul-basyar(i).

ई त बस इंसान के शब्द ह.”


26
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:26)

سَاُصْلِيْهِ سَقَرَ

sa'uṣlīhi saqar(a).

बाद में, हम ओकरा के (नरक) सकार में डाल देब,


27
Q.S अल-मुद्दथथिर के ह (74:27)

وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا سَقَرُۗ

wa mā adrāka mā saqar(a).

आ का रउवा जानत बानी कि (नरक) सकर का ह?


1
Q.S अल-काफिरुन के ह (109:1)

قُلْ يٰٓاَيُّهَا الْكٰفِرُوْنَۙ

qul yā ayyuhal-kāfirūn(a).

(मुहम्मद) कहऽ, “हे काफिर लोग!