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Q.S अल-मुमतहानाह के ह (60:8)
لَا يَنْهٰىكُمُ اللّٰهُ عَنِ الَّذِيْنَ لَمْ يُقَاتِلُوْكُمْ فِى الدِّيْنِ وَلَمْ يُخْرِجُوْكُمْ مِّنْ دِيَارِكُمْ اَنْ تَبَرُّوْهُمْ وَتُقْسِطُوْٓا اِلَيْهِمْۗ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُقْسِطِيْنَ
lā yanhākumullāhu ‘anil-lażīna lam yuqātilūkum fid-dīni wa lam yukhrijūkum min diyārikum an tabarrūhum wa tuqsiṭū ilaihim, innallāha yuḥibbul-muqsiṭīn(a).
अल्लाह रउरा के भलाई करे से मना नइखन करत आ ओह लोग का साथे निष्पक्ष होखे के मना करत बाड़न जे रउरा से धर्म के मामिला में ना लड़त बा आ रउरा के रउरा नइहर से ना निकालत बा. सचमुच अल्लाह उ लोग से प्यार करेले, जवन कि न्यायसंगत काम करेले।