يٰصَاحِبَيِ السِّجْنِ اَمَّآ اَحَدُكُمَا فَيَسْقِيْ رَبَّهٗ خَمْرًا ۗوَاَمَّا الْاٰخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْ رَّأْسِهٖ ۗ قُضِيَ الْاَمْرُ الَّذِيْ فِيْهِ تَسْتَفْتِيٰنِۗ
yā ṣāḥibayis-sijni ammā aḥadukumā fa yasqī rabbahū khamrā(n), wa ammal-ākharu fa yuṣlabu fa ta'kuluṭ-ṭairu mir ra'sih(ī), quḍiyal-amrul-lażī fīhi tastaftiyān(i).
हे जेल के दू गो कैदी लोग, "रउरा में से एगो के जिम्मा अपना मालिक के शराब के इंतजाम के जिम्मा होई। रहल बात दूसरा के त ओकरा के सूली प चढ़ावल जाई, अवुरी चिरई उनुका माथा के कुछ हिस्सा खा जईहे। जवना मामला के बारे में रउआ हमरा से पूछनी, ओकर जवाब मिल गईल बा।"
وَرَفَعَ اَبَوَيْهِ عَلَى الْعَرْشِ وَخَرُّوْا لَهٗ سُجَّدًاۚ وَقَالَ يٰٓاَبَتِ هٰذَا تَأْوِيْلُ رُءْيَايَ مِنْ قَبْلُ ۖقَدْ جَعَلَهَا رَبِّيْ حَقًّاۗ وَقَدْ اَحْسَنَ بِيْٓ اِذْ اَخْرَجَنِيْ مِنَ السِّجْنِ وَجَاۤءَ بِكُمْ مِّنَ الْبَدْوِ مِنْۢ بَعْدِ اَنْ نَّزَغَ الشَّيْطٰنُ بَيْنِيْ وَبَيْنَ اِخْوَتِيْۗ اِنَّ رَبِّيْ لَطِيْفٌ لِّمَا يَشَاۤءُ ۗاِنَّهٗ هُوَ الْعَلِيْمُ الْحَكِيْمُ
wa rafa‘a abawaihi ‘alal-‘arsyi wa kharrū lahū sujjadā(n), wa qāla yā abati hāżā ta'wīlu ru'yāya min qabl(u), qad ja‘alahā rabbī ḥaqqā(n), wa qad aḥsana bī iż akhrajanī minas-sijni wa jā'a bikum minal-badwi mim ba‘di an nazagasy-syaiṭānu bainī wa baina ikhwatī, inna rabbī laṭīful limā yasyā'(u), innahū huwal-‘alīmul-ḥakīm(u).
आ ऊ अपना माई-बाबूजी के गद्दी पर बइठा दिहले. आ ऊ लोग (सब) ओकरा (यूसुफ) के प्रणाम कइल। आ ऊ (यूसुफ) कहले, "हे हमार बाबूजी! ई हमार पिछला सपना के व्याख्या ह। आ साँचहू हमार रब एकरा के साकार कर दिहले बाड़न. साँचहू हमार रब हमरा साथे भलाई कइले बाड़न, जब ऊ हमरा के जेल से मुक्त कर दिहले बाड़न आ जब ऊ रउरा के गाँव से ले अइले, शैतान हमरा आ हमरा भाई लोग के बीच (रिश्ता) के नष्ट कइला का बाद. साँचहू हमार रब जवन चाहत बाड़न ओहमें कोमल बाड़न. साँचहू ऊ हउवें सर्वज्ञ, सर्वज्ञानी के बा।