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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Ilmu Fatwa Etika bertanya Berlebihan dalam bertanya

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कुल आयत : 6
101
Q.S अल-मैदाह के ह (5:101)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تَسْـَٔلُوْا عَنْ اَشْيَاۤءَ اِنْ تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْ ۚوَاِنْ تَسْـَٔلُوْا عَنْهَا حِيْنَ يُنَزَّلُ الْقُرْاٰنُ تُبْدَ لَكُمْ ۗعَفَا اللّٰهُ عَنْهَا ۗوَاللّٰهُ غَفُوْرٌ حَلِيْمٌ

yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tas'alū ‘an asy-yā'a in tubda lakum tasu'kum, wa in tas'alū ‘anhā ḥīna yunazzalul-qur'ānu tubda lakum, ‘afallāhu ‘anhā, wallāhu gafūrun ḥalīm(un).

हे विश्वास करे वाला लोग! (अपना नबी से) अइसन बात मत पूछीं जवन अगर रउरा के समझावल जाव त (असल में) रउरा के परेशानी पैदा करी. अगर रउआ ओकरा से पूछब कि कुरान कब उतारल जा रहल बा त (निःसंदेह) रउआ के समझावल जाई। अल्लाह (रउरा) के ओह बारे में माफ कर दिहले बाड़न। आ अल्लाह परम क्षमाशील, परम दयालु हवें।


102
Q.S अल-मैदाह के ह (5:102)

قَدْ سَاَلَهَا قَوْمٌ مِّنْ قَبْلِكُمْ ثُمَّ اَصْبَحُوْا بِهَا كٰفِرِيْنَ

qad sa'alahā qaumum min qablikum ṡumma aṣbaḥū bihā kāfirīn(a).

सचमुच, रउआ से पहिले एगो समूह रहे जवन लोग (अपना नबी से) भी अइसने बात पूछत रहे, तब उ लोग काफिर हो गईल।


187
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:187)

يَسْـَٔلُوْنَكَ عَنِ السَّاعَةِ اَيَّانَ مُرْسٰىهَاۗ قُلْ اِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ رَبِّيْۚ لَا يُجَلِّيْهَا لِوَقْتِهَآ اِلَّا هُوَۘ ثَقُلَتْ فِى السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضِۗ لَا تَأْتِيْكُمْ اِلَّا بَغْتَةً ۗيَسْـَٔلُوْنَكَ كَاَنَّكَ حَفِيٌّ عَنْهَاۗ قُلْ اِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ اللّٰهِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُوْنَ

yas'alūnaka ‘anis-sā‘ati ayyāna mursāhā, qul innamā ‘ilmuhā ‘inda rabbī, lā yujallīhā liwaqtihā illā huw(a), ṡaqulat fis-samāwāti wal-arḍ(i), lā ta'tīkum illā bagtah(tan), yas'alūnaka ka'annaka ḥafiyyun ‘anhā, qul innamā ‘ilmuhā ‘indallāhi wa lākinna akṡaran nāsi lā ya‘lamūn(a).

उ लोग रउआ (मुहम्मद) से कयामत के बारे में पूछेले कि, "कब होई?" कह दीं कि "वास्तव में, एपोकैलिप्स के ज्ञान हमरा प्रभु के लगे बा; उनुका छोड़ के केहु (केहू) एकर घटना के समय के बारे में नईखे बता सकत। (एपोकैलिप्स) बहुत गंभीर बा (जीव खातिर एकर उथल-पुथल) जवन आकाश में अवुरी धरती प, अचानक के छोड़ के आपके लगे ना आई।" ऊ लोग रउरा से अइसे पूछेला जइसे रउरा मालूम होखे. कह (मुहम्मद) "वास्तव में (कयामत के दिन) के ज्ञान अल्लाह के लगे बा, लेकिन अधिकांश लोग के पता नईखे।"


48
Q.S योना के ह (10:48)

وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ

wa yaqūlūna matā hāżal-wa‘du in kuntum ṣādiqīn(a).

आ ऊ लोग कहल कि "अगर रउरा साँच कहब त धमकी कब (आ जाई)?"


7
Q.S अल-हुजुरात के ह (49:7)

وَاعْلَمُوْٓا اَنَّ فِيْكُمْ رَسُوْلَ اللّٰهِ ۗ لَوْ يُطِيْعُكُمْ فِيْ كَثِيْرٍ مِّنَ الْاَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ حَبَّبَ اِلَيْكُمُ الْاِيْمَانَ وَزَيَّنَهٗ فِيْ قُلُوْبِكُمْ وَكَرَّهَ اِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوْقَ وَالْعِصْيَانَ ۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الرّٰشِدُوْنَۙ

wa‘lamū anna fīkum rasūlallāh(i), lau yuṭī‘ukum fī kaṡīrim minal-amri la‘anittum wa lākinnallāha ḥabbaba ilaikumul-īmāna wa zayyanahū fī qulūbikum wa karraha ilaikumul-kufra wal-fusūqa wal-‘iṣyān(a), ulā'ika humur-rāsyidūn(a).

अउर जान लीं कि तोहनी में अल्लाह के रसूलुल्लाह भी बाड़े। अगर उ बहुत बात में तोहार बात मानले रहित त तू परेशानी में पड़ गईल रहित। लेकिन अल्लाह तोहनी के इमान से प्रेम करवले बाड़े अवुरी आपके दिल में सुंदर बना देले बाड़े अवुरी कुफर, बुराई अवुरी अवज्ञा से नफरत करेवाला बना देले बाड़े। इहे लोग सीधा रास्ता प चलेले।


42
Q.S अन-नाजीअत के बा (79:42)

يَسْـَٔلُوْنَكَ عَنِ السَّاعَةِ اَيَّانَ مُرْسٰىهَاۗ

yas'alūnaka ‘anis-sā‘ati ayyāna mursāhā.

उ लोग (काफिर) रउआ (हे मुहम्मद) से कयामत के बारे में पूछेले कि, "कब होई?"