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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Ilmu Fatwa Fatwa halal dan haram Kejelasan halal dan haram

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कुल आयत : 4
173
Q.S अल-बकराह के ह (2:173)

اِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنْزِيْرِ وَمَآ اُهِلَّ بِهٖ لِغَيْرِ اللّٰهِ ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَّلَا عَادٍ فَلَآ اِثْمَ عَلَيْهِ ۗ اِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

innamā ḥarrama ‘alaikumul-maitata wad-dama wa laḥmal-khinzīri wa mā uhilla bihī ligairillāh(i), fa maniḍṭurra gaira bāgiw wa lā ‘ādin falā iṡma ‘alaih(i), innallāha gafūrur raḥīm(un).

दरअसल, उ रउआ से खाली अल्लाह के अलावा (नाम के) द्वारा कत्ल कइल जानवरन के शव, खून, सूअर के मांस आ (मांस) से मना कइले बाड़न। लेकिन जेकरा के (खाए खातिर) मजबूर कईल जाला, एहसे ना कि उ चाहत बा अवुरी ना (उहो) सीमा से बाहर, तब ओकरा खाती कवनो पाप नईखे। सचमुच अल्लाह क्षमाशील, दयालु हवे।


13
Q.S अन-निसा के बा (4:13)

تِلْكَ حُدُوْدُ اللّٰهِ ۗ وَمَنْ يُّطِعِ اللّٰهَ وَرَسُوْلَهٗ يُدْخِلْهُ جَنّٰتٍ تَجْرِيْ مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهٰرُ خٰلِدِيْنَ فِيْهَا ۗ وَذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيْمُ

tilka ḥudūdullāh(i), wa may yuṭi‘illāha wa rasūlahū yudkhilhu jannātin tajrī min taḥtihal-anhāru khālidīna fīhā, wa żālikal-fauzul-‘aẓīm(u).

उहे अल्लाह के सीमा (कानून) ह। जे भी अल्लाह आ उनकर रसूलुल्लाह के बात मानी, उ ओह लोग के बगइचा में घुस जाई जवना के नीचे नदी बहत रहेला, उ लोग ओहि में अनन्त काल तक रहेला। आ ऊ एगो बड़हन जीत बा.


26
Q.S अन-निसा के बा (4:26)

يُرِيْدُ اللّٰهُ لِيُبَيِّنَ لَكُمْ وَيَهْدِيَكُمْ سُنَنَ الَّذِيْنَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَيَتُوْبَ عَلَيْكُمْ ۗ وَاللّٰهُ عَلِيْمٌ حَكِيْمٌ

yurīdullāhu liyubayyina lakum wa yahdiyakum sunanal-lażīna min qablikum wa yatūba ‘alaikum, wallāhu ‘alīmun ḥakīm(un).

अल्लाह रउरा के (अपना नियम) समझावल चाहत बाड़न, आ रउरा से पहिले के लोग (नबी आ धर्मपरायण लोग) के (जीवन के) रास्ता देखावल चाहत बाड़न आ ऊ रउरा पश्चाताप के स्वीकार कर लेत बाड़न. अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वबुद्धिमान हवें।


1
Q.S एन-नूर के बा (24:1)

سُوْرَةٌ اَنْزَلْنٰهَا وَفَرَضْنٰهَا وَاَنْزَلْنَا فِيْهَآ اٰيٰتٍۢ بَيِّنٰتٍ لَّعَلَّكُمْ تَذَكَّرُوْنَ

sūratun anzalnāhā wa faraḍnāhā wa anzalnā fīhā āyātim bayyinātil la‘allakum tażakkarūn(a).

(इ) एगो सूरह ह जवना के हमनी के भेजले बानी जा आ हमनी के फर्ज (कानून के पालन) कइले बानी जा, आ हमनी के ओकरा में (अल्लाह के महानता के) साफ निशान भेजले बानी जा, ताकि रउआ लोग याद कर सकीले।