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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak Akhlak Mulia Berbuat baik Berbakti kepada orang tua Yang patut dijadikan teman

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कुल आयत : 2
35
Q.S अल-मैदाह (5:35)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَابْتَغُوْٓا اِلَيْهِ الْوَسِيْلَةَ وَجَاهِدُوْا فِيْ سَبِيْلِهٖ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُوْنَ

yā ayyuhal-lażīna āmanuttaqullāha wabtagū ilaihil-wasīlata wa jāhidū fī sabīlihī la‘allakum tufliḥūn(a).

हे विश्वास करनिहार! अल्लाह स डरू आ हुनका नजदीक आबय लेल वसीला (मार्ग) के तलाश करू, आ हुनकर रास्ता पर प्रयास करू (संघर्ष) करू, ताकि अहाँ सफल भ जायब।


100
Q.S यूसुफ (12:100)

وَرَفَعَ اَبَوَيْهِ عَلَى الْعَرْشِ وَخَرُّوْا لَهٗ سُجَّدًاۚ وَقَالَ يٰٓاَبَتِ هٰذَا تَأْوِيْلُ رُءْيَايَ مِنْ قَبْلُ ۖقَدْ جَعَلَهَا رَبِّيْ حَقًّاۗ وَقَدْ اَحْسَنَ بِيْٓ اِذْ اَخْرَجَنِيْ مِنَ السِّجْنِ وَجَاۤءَ بِكُمْ مِّنَ الْبَدْوِ مِنْۢ بَعْدِ اَنْ نَّزَغَ الشَّيْطٰنُ بَيْنِيْ وَبَيْنَ اِخْوَتِيْۗ اِنَّ رَبِّيْ لَطِيْفٌ لِّمَا يَشَاۤءُ ۗاِنَّهٗ هُوَ الْعَلِيْمُ الْحَكِيْمُ

wa rafa‘a abawaihi ‘alal-‘arsyi wa kharrū lahū sujjadā(n), wa qāla yā abati hāżā ta'wīlu ru'yāya min qabl(u), qad ja‘alahā rabbī ḥaqqā(n), wa qad aḥsana bī iż akhrajanī minas-sijni wa jā'a bikum minal-badwi mim ba‘di an nazagasy-syaiṭānu bainī wa baina ikhwatī, inna rabbī laṭīful limā yasyā'(u), innahū huwal-‘alīmul-ḥakīm(u).

आ ओ अपन माता-पिता केँ सिंहासन पर ठाढ़ कयलनि। आ ओ सभ (सब) हुनका (यूसुफ) प्रणाम केलनि। आ ओ (यूसुफ) कहलनि, "हे हमर पिता! ई हमर पूर्व सपना के व्याख्या अछि। आ सचमुच हमर प्रभु एकरा साकार क देने छथि। सचमुच हमर प्रभु हमरा संग भलाई केने छथि, जखन ओ हमरा जेल स मुक्त केलथि आ जखन ओ अहाँ के गाम स अनने छलाह, तखन शैतान हमरा आ हमर भाइ सब के बीच (सम्बन्ध) के नष्ट क देलक। सचमुच हमर प्रभु जे चाहैत छथि ताहि मे कोमल छथि। सचमुच, ओ छथि।" सर्वज्ञ, सर्वज्ञ।