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Q.S अल-हज (22:25)
اِنَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَيَصُدُّوْنَ عَنْ سَبِيْلِ اللّٰهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذِيْ جَعَلْنٰهُ لِلنَّاسِ سَوَاۤءً ۨالْعَاكِفُ فِيْهِ وَالْبَادِۗ وَمَنْ يُّرِدْ فِيْهِ بِاِلْحَادٍۢ بِظُلْمٍ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ اَلِيْمٍ ࣖ
innal-lażīna kafarū wa yaṣuddūna ‘an sabīlillāhi wal-masjidil-ḥarāmil-lażī ja‘alnāhu lin-nāsi sawā'anil-‘ākifu fīhi wal-bād(i), wa may yurid fīhi bi'ilḥādim biẓulmin nużiqhu min ‘ażābin alīm(in).
सचमुच, जे लोग अविश्वास करै छै आरू जे (मनुष्य क॑) अल्लाह केरऽ रास्ता स॑ आरू पवित्र मस्जिद स॑ बाधा पहुँचै छै जेकरा हम्में सब मनुष्य लेली खुला करी देल॑ छियै, चाहे वू वहाँ रह॑ वाला होय या बाहर स॑ आबै वाला आरू जे भी ओकरा म॑ अन्याय करै के इरादा रखै छै, ओकरा हम्में निश्चित रूप स॑ ओकरा कष्टदायक सजा देबै ।