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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ पैगंबर और प्रेरित (विश्वास का स्तंभ संख्या 4) अपनी मृत्यु तक अली का नेतृत्व ऐसा दोस्त जो तवाक्कुफ़ हो या असहमतियों से दूर रहता हो

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कुल श्लोक : 1
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Q.S अल-Hujurat (49:9)

وَاِنْ طَاۤىِٕفَتٰنِ مِنَ الْمُؤْمِنِيْنَ اقْتَتَلُوْا فَاَصْلِحُوْا بَيْنَهُمَاۚ فَاِنْۢ بَغَتْ اِحْدٰىهُمَا عَلَى الْاُخْرٰى فَقَاتِلُوا الَّتِيْ تَبْغِيْ حَتّٰى تَفِيْۤءَ اِلٰٓى اَمْرِ اللّٰهِ ۖفَاِنْ فَاۤءَتْ فَاَصْلِحُوْا بَيْنَهُمَا بِالْعَدْلِ وَاَقْسِطُوْا ۗاِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُقْسِطِيْنَ

wa in ṭā'ifatāni minal-mu'minīnaqtatalū fa aṣliḥū bainahumā, fa im bagat iḥdāhumā ‘alal-ukhrā fa qātilul-latī tabgī ḥattā tafī'a ilā amrillāh(i), fa in fā'at fa aṣliḥū bainahumā bil-‘adli wa aqsiṭū, innallāha yuḥibbul-muqsiṭīn(a).

और अगर मोमिनों की दो जमातें आपस में लड़ पड़ें, तो उनके बीच सुलह कराओ। अगर उनमें से एक (जमात) दूसरी पर ज़ुल्म करे, तो उस ज़ालिम (जमात) से लड़ो, यहाँ तक कि वह अल्लाह के हुक्म की ओर लौट आए। अगर वह लौट आए, तो उनके बीच इंसाफ़ के साथ सुलह कराओ, और इंसाफ़ से काम लो। निश्चय ही, अल्लाह इंसाफ़ करने वालों से मोहब्बत करता है।