اِذَآ اُلْقُوْا فِيْهَا سَمِعُوْا لَهَا شَهِيْقًا وَّهِيَ تَفُوْرُۙ
iżā ulqū fīhā sami‘ū lahā syahīqaw wa hiya tafūr(u).
जब ओह लोग के ओकरा में फेंकल गइल त ओह लोग के नरक के भयानक आवाज सुनाई पड़ल जब ऊ जरत रहे.
تَكَادُ تَمَيَّزُ مِنَ الْغَيْظِۗ كُلَّمَآ اُلْقِيَ فِيْهَا فَوْجٌ سَاَلَهُمْ خَزَنَتُهَآ اَلَمْ يَأْتِكُمْ نَذِيْرٌۙ
takādu tamayyazu minal-gaiẓ(i), kullamā ulqiya fīhā faujun sa'alahum khazanatuhā alam ya'tikum nażīr(un).
लगभग गुस्सा से फूटत रहे। हर बेर जब कवनो समूह (काफिरन के) ओकरा में फेंकल जाला त ओकर रखवाला (ओकनी से पूछिहें), “का कवनो चेतावनी देबे वाला ना रहे जे रउरा लगे (एह दुनिया में) आइल रहे?”
نَارُ اللّٰهِ الْمُوْقَدَةُۙ
nārullāhil-mūqadah(tu).
(अर्थात) अल्लाह के (सज़ा के) आग जवन जरावल जाला,
الَّتِيْ تَطَّلِعُ عَلَى الْاَفْـِٕدَةِۗ
allatī taṭṭali‘u ‘alal-af'idah(ti).
जवन दिल के (जले) जाला।
اِنَّهَا عَلَيْهِمْ مُّؤْصَدَةٌۙ
innahā ‘alaihim mu'ṣadah(tun).
सचमुच, आग (अपना) के ऊपर कस के बंद बा,
فِيْ عَمَدٍ مُّمَدَّدَةٍ ࣖ
fī ‘amadim mumaddadah(tin).
(जबकि ऊ लोग) लमहर खंभा से बान्हल रहे।