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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Wanita, Darah dan Nikah Para wanita yang tadinya tidak baik lalu bertaubat Zulaikha (Istri Al Aziz)

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कुल आयत : 4
23
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:23)

وَرَاوَدَتْهُ الَّتِيْ هُوَ فِيْ بَيْتِهَا عَنْ نَّفْسِهٖ وَغَلَّقَتِ الْاَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۗقَالَ مَعَاذَ اللّٰهِ اِنَّهٗ رَبِّيْٓ اَحْسَنَ مَثْوَايَۗ اِنَّهٗ لَا يُفْلِحُ الظّٰلِمُوْنَ

wa rāwadathul-latī huwa fī baitihā ‘an nafsihī wa gallaqatil-abwāba wa qālat haita lak(a), qāla ma‘āżallāhi innahū rabbī aḥsana maṡwāy(a), innahū lā yuflihuẓ-ẓālimūn(a).

आ जवन मेहरारू ऊ (यूसुफ) उनका घर में रहत रहले ऊ उनका के बहका दिहलसि. ऊ दरवाजा बंद क के कहलन, “हमरा लगे आ जा.” यूसुफ कहले कि, हम अल्लाह के शरण लेतानी, सचमुच हमार मालिक हमरा संगे बढ़िया व्यवहार कईले बाड़े। साँचहू अन्यायी के भाग्य ना होई।


51
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:51)

قَالَ مَا خَطْبُكُنَّ اِذْ رَاوَدْتُّنَّ يُوْسُفَ عَنْ نَّفْسِهٖۗ قُلْنَ حَاشَ لِلّٰهِ مَا عَلِمْنَا عَلَيْهِ مِنْ سُوْۤءٍ ۗقَالَتِ امْرَاَتُ الْعَزِيْزِ الْـٰٔنَ حَصْحَصَ الْحَقُّۖ اَنَا۠ رَاوَدْتُّهٗ عَنْ نَّفْسِهٖ وَاِنَّهٗ لَمِنَ الصّٰدِقِيْنَ

qāla mā khaṭbukunna iż rāwattunna yūsufa ‘an nafsih(ī), qulna ḥāsya lillāhi mā ‘alimnā ‘alaihi min sū'(in), qālatimra'atul-‘azīzil-āna ḥaṣḥaṣal-ḥaqq(u), ana rāwattuhū ‘an nafsihī wa innahū laminaṣ-ṣādiqīn(a).

उ (राजा) (मेहरारू लोग से) कहले, “जब तू यूसुफ के अधीन होखे के प्रलोभन देले रहलू त रउआ कईसन रहनी?” उ लोग कहल कि, “अल्लाह एकदम सही बाड़े, हमनी के उनुका बारे में कवनो बुराई ना जानत रहनी।” अल-अजीज के पत्नी कहली कि, “अब सच्चाई साफ हो गईल बा, हम ही उनुका के प्रलोभन अवुरी बहकवले रहनी अवुरी सचमुच उ सच्चाई वाला में से एगो रहले।”


52
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:52)

ذٰلِكَ لِيَعْلَمَ اَنِّيْ لَمْ اَخُنْهُ بِالْغَيْبِ وَاَنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِيْ كَيْدَ الْخَاۤىِٕنِيْنَ ۔

Żālika liya‘lama annī lam akhunhu bil-gaibi wa annallāha lā yahdī kaidal-khā'inīn(a).

(यूसुफ कहले) "अइसन कि उ (अल-अजीज) के पता चल जाए कि हम सचमुच उनुका संगे धोखा ना कईले रहनी, जब उ उहाँ (घर में) ना रहले, अवुरी अल्लाह के धोखा देवे वाला लोग के धोखा के मंजूरी नईखे।"


53
Q.S यूसुफ के नाम से जानल जाला (12:53)

۞ وَمَآ اُبَرِّئُ نَفْسِيْۚ اِنَّ النَّفْسَ لَاَمَّارَةٌ ۢ بِالسُّوْۤءِ اِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّيْۗ اِنَّ رَبِّيْ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

wa mā ubarri'u nafsī, innan-nafsa la'ammāratum bis-sū'i illā mā raḥima rabbī, inna rabbī gafūrur raḥīm(un).

आ हम अपना के (गलती से) मुक्त (घोषणा) ना करेनी, काहे कि असल में कामवासना हमेशा बुराई के ओर ले जाला, सिवाय (वासना) के जवना खातिर हमार प्रभु दया कइले बाड़न। सचमुच हमार प्रभु क्षमाशील, परम दयालु हवें।