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Q.S अल-हशर (59:23)
هُوَ اللّٰهُ الَّذِيْ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَ ۚ اَلْمَلِكُ الْقُدُّوْسُ السَّلٰمُ الْمُؤْمِنُ الْمُهَيْمِنُ الْعَزِيْزُ الْجَبَّارُ الْمُتَكَبِّرُۗ سُبْحٰنَ اللّٰهِ عَمَّا يُشْرِكُوْنَ
huwallāhul-lażī lā ilāha illā huw(a), al-malikul-quddūsus-salāmul-mu'minul-muhaiminul-‘azīzul-jabbārul-mutakabbir(u), subḥānallāhi ‘ammā yusyrikūn(a).
ओ अल्लाह छथि आ हुनका छोड़ि कोनो देवता नहि छथि । महाराजा, परम पवित्र, परम समृद्ध, सुरक्षा के रक्षक, सुरक्षा के रक्षक, परम पराक्रमी, सर्वशक्तिमान, जिनका सब महिमा अछि, महिमा अल्लाह के हो जे ओ सब एक दोसरा के संग जे किछु जोड़ैत छथि |
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Q.S अन-नस्र (110:2)
وَرَاَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُوْنَ فِيْ دِيْنِ اللّٰهِ اَفْوَاجًاۙ
wa ra'aitan-nāsa yadkhulūna fī dīnillāhi afwājā(n).
आ अहाँ देखैत छी जे लोक अल्लाह के धर्म मे उमड़ैत अछि,