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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Allah (rukun iman no.1) Nama dan Sifat Allah Al-Ghafur

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कुल आयत : 5
173
Q.S अल-बकराह के ह (2:173)

اِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنْزِيْرِ وَمَآ اُهِلَّ بِهٖ لِغَيْرِ اللّٰهِ ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَّلَا عَادٍ فَلَآ اِثْمَ عَلَيْهِ ۗ اِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

innamā ḥarrama ‘alaikumul-maitata wad-dama wa laḥmal-khinzīri wa mā uhilla bihī ligairillāh(i), fa maniḍṭurra gaira bāgiw wa lā ‘ādin falā iṡma ‘alaih(i), innallāha gafūrur raḥīm(un).

दरअसल, उ रउआ से खाली अल्लाह के अलावा (नाम के) द्वारा कत्ल कइल जानवरन के शव, खून, सूअर के मांस आ (मांस) से मना कइले बाड़न। लेकिन जेकरा के (खाए खातिर) मजबूर कईल जाला, एहसे ना कि उ चाहत बा अवुरी ना (उहो) सीमा से बाहर, तब ओकरा खाती कवनो पाप नईखे। सचमुच अल्लाह क्षमाशील, दयालु हवे।


110
Q.S अन-निसा के बा (4:110)

وَمَنْ يَّعْمَلْ سُوْۤءًا اَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهٗ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللّٰهَ يَجِدِ اللّٰهَ غَفُوْرًا رَّحِيْمًا

wa may ya‘mal sū'an au yaẓlim nafsahū ṡumma yastagfirillāha yajidillāha gafūrar raḥīmā(n).

आ जे कवनो अपराध करी आ अपना पर अन्याय करी, ओकरा बाद अल्लाह से माफी मांगी, ओकरा अल्लाह परम क्षमाशील, परम दयालु जरूर मिली.


53
Q.S अज-जुमार के ह (39:53)

۞ قُلْ يٰعِبَادِيَ الَّذِيْنَ اَسْرَفُوْا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوْا مِنْ رَّحْمَةِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوْبَ جَمِيْعًا ۗاِنَّهٗ هُوَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ

qul yā ‘ibādiyal-lażīna asrafū ‘alā anfusihim lā taqnaṭū mir raḥmatillāh(i), innallāha yagfiruż-żunūba jamī‘ā(n), innahū huwal-gafūrur-raḥīm(u).

कहऽ, "हे हमार सेवक जे अपना सीमा से बाहर निकल जाला! अल्लाह के दया से निराश मत होखऽ। साँचहू अल्लाह सबके पाप माफ कर देले। साँचहू उ परम क्षमाशील, परम दयालु हवे।"


5
Q.S ऐश-शूरा के बा (42:5)

تَكَادُ السَّمٰوٰتُ يَتَفَطَّرْنَ مِنْ فَوْقِهِنَّ وَالْمَلٰۤىِٕكَةُ يُسَبِّحُوْنَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيَسْتَغْفِرُوْنَ لِمَنْ فِى الْاَرْضِۗ اَلَآ اِنَّ اللّٰهَ هُوَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ

takādus-samāwātu yatafaṭṭarna min fauqihinna wal-malā'ikatu yusabbiḥūna biḥamdi rabbihim wa yastagfirūna liman fil-arḍ(i), alā innallāha huwal-gafūrur-raḥīm(u).

ऊपर से लगभग आसमान टूट गईल (अल्लाह के महानता के चलते) अवुरी फरिश्ता अपना रब के स्तुति के महिमामंडन कईले अवुरी धरती प लोग खाती माफी मंगले। याद रखीं, वाकई अल्लाह परम क्षमाशील, परम दयालु हवें।


2
Q.S अल-मुल्क के ह (67:2)

ۨالَّذِيْ خَلَقَ الْمَوْتَ وَالْحَيٰوةَ لِيَبْلُوَكُمْ اَيُّكُمْ اَحْسَنُ عَمَلًاۗ وَهُوَ الْعَزِيْزُ الْغَفُوْرُۙ

allażī khalaqal-mauta wal-ḥayāta liyabluwakum ayyukum aḥsanu ‘amalā(n), wa huwal-‘azīzul-gafūr(u).

जे मौत आ जीवन के रचले बा, तोहनी के परख खातिर, तोहनी में से कवन काम में बेहतर बा। आ ऊ सर्वशक्तिमान, परम क्षमाशील हवें।