91
Q.S अल-मैदाह (5:91)
اِنَّمَا يُرِيْدُ الشَّيْطٰنُ اَنْ يُّوْقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاۤءَ فِى الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَنْ ذِكْرِ اللّٰهِ وَعَنِ الصَّلٰوةِ فَهَلْ اَنْتُمْ مُّنْتَهُوْنَ
innamā yurīdusy-syaiṭānu ay yūqi‘a bainakumul-‘adāwata wal-bagḍā'a fil-khamri wal-maisiri wa yaṣuddakum ‘an żikrillāhi wa ‘aniṣ-ṣalāti fahal antum muntahūn(a).
शराब पीबय आ जुआ खेलय सं शैतान के इरादा मात्र अहां सभ मे दुश्मनी आओर घृणा पैदा करय के अछि, आओर अहां सभ के अल्लाह के याद करय आओर नमाज पढ़य सं रोकय के अछि, त की अहां सभ रुकय नहि चाहय छी?
3
Q.S एट-टकथुर (102:3)
كَلَّا سَوْفَ تَعْلَمُوْنَۙ
kallā saufa ta‘lamūn(a).
कोनो गप्प नहि! बाद मे अहाँ केँ पता चलत (अपन कर्म केर परिणाम),