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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Mulia Cinta dan kasih sayang

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कुल आयत : 3
199
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:199)

خُذِ الْعَفْوَ وَأْمُرْ بِالْعُرْفِ وَاَعْرِضْ عَنِ الْجٰهِلِيْنَ

khużil-‘afwa wa'mur bil-‘urfi wa a‘riḍ ‘anil-jāhilīn(a).

माफ करे वाला रहीं आ लोग से कह दीं कि जवन बुद्धिमानी बा ऊ करऽ, आ बेवकूफ लोग पर ध्यान मत दीं.


21
Q.S अर-रम के बा (30:21)

وَمِنْ اٰيٰتِهٖٓ اَنْ خَلَقَ لَكُمْ مِّنْ اَنْفُسِكُمْ اَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوْٓا اِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُمْ مَّوَدَّةً وَّرَحْمَةً ۗاِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَاٰيٰتٍ لِّقَوْمٍ يَّتَفَكَّرُوْنَ

wa min āyātihī an khalaqa lakum min anfusikum azwājal litaskunū ilaihā wa ja‘ala bainakum mawaddataw wa raḥmah(tan), inna fī żālika la'āyātil liqaumiy yatafakkarūn(a).

आ उनकर (अपना महानता के) संकेतन में ईहो बा कि ऊ रउरा खातिर रउरा तरह के साथी बनवले बाड़न, जेहसे कि रउरा ओह लोग का साथे झुकल रहीं आ सहज महसूस करीं, आ रउरा बीच में प्रेम आ स्नेह के भाव बनवले बाड़न. दरअसल, एह में कि सोचे वाला लोग खातिर सही मायने में (अल्लाह के महानता के) निशानी बा।


29
Q.S अल-फत के ह (48:29)

مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰهِ ۗوَالَّذِيْنَ مَعَهٗٓ اَشِدَّاۤءُ عَلَى الْكُفَّارِ رُحَمَاۤءُ بَيْنَهُمْ تَرٰىهُمْ رُكَّعًا سُجَّدًا يَّبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانًا ۖ سِيْمَاهُمْ فِيْ وُجُوْهِهِمْ مِّنْ اَثَرِ السُّجُوْدِ ۗذٰلِكَ مَثَلُهُمْ فِى التَّوْرٰىةِ ۖوَمَثَلُهُمْ فِى الْاِنْجِيْلِۚ كَزَرْعٍ اَخْرَجَ شَطْـَٔهٗ فَاٰزَرَهٗ فَاسْتَغْلَظَ فَاسْتَوٰى عَلٰى سُوْقِهٖ يُعْجِبُ الزُّرَّاعَ لِيَغِيْظَ بِهِمُ الْكُفَّارَ ۗوَعَدَ اللّٰهُ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ مِنْهُمْ مَّغْفِرَةً وَّاَجْرًا عَظِيْمًا ࣖ

muḥammadur rasūlullāh(i), wal-lażīna ma‘ahū asyiddā'u ‘alal-kuffāri ruḥamā'u bainahum tarāhum rukka‘an sujjaday yabtagūna faḍlam minallāhi wa riḍwānā(n), sīmāhum fī wujūhihim min aṡaris-sujūd(i), żālika maṡaluhum fit-taurāh(ti), wa maṡaluhum fil-injīl(i), kazar‘in akhraja syaṭ'ahū fa āzarahū fastaglaẓa fastawā ‘alā sūqihī yu‘jibuz-zurrā‘a liyagīẓa bihimul-kuffār(a), wa‘adallāhul-lażīna āmanū wa ‘amiluṣ-ṣāliḥāti minhum magfirataw wa ajran ‘aẓīmā(n).

मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह रहले अवुरी उनुका संगे आवे वाला लोग काफिरन के प्रति कठोर रहले, लेकिन एक दूसरा प दयालु रहले। रउरा देखत बानी कि ऊ लोग अल्लाह के किरपा आ उनुकर रजत के तलाश में प्रणाम करत सजदा करत बा. ओह लोग के चेहरा पर सजदा के निशान लउकत रहे। अइसने बा इनहन के बिसेसता (प्रगट) तोराह में आ इनहन के बिसेसता (प्रगट) सुसमाचार में, यानी कि जइसे एगो बीज एगो अंकुर बाहर भेज देला, फिर अंकुर मजबूत हो जाला आ फिर बड़ हो जाला आ सीधा तना पर ऊपर हो जाला; पौधा अपना रोपनी करे वाला लोग के खुश करेला काहे कि अल्लाह काफिरन के दिल (मुसलमानन के शक्ति से) चिढ़ावल चाहत बाड़े। अल्लाह ओह लोग के वादा करेले जे विश्वास करेले अवुरी ओ लोग के बीच नीमन काम करेले, माफी अवुरी बड़ इनाम देवेले।