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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Akhlak dan Adab Akhlak Akhlak Mulia Ketenangan

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कुल आयत : 4
28
Q.S अर-रा'द के बा (13:28)

الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَتَطْمَىِٕنُّ قُلُوْبُهُمْ بِذِكْرِ اللّٰهِ ۗ اَلَا بِذِكْرِ اللّٰهِ تَطْمَىِٕنُّ الْقُلُوْبُ ۗ

al-lażīna āmanū wa taṭma'innu qulūbuhum biżikrillāh(i), alā biżikrillāhi taṭma'innul-qulūb(u).

(अर्थात) ऊ लोग जे विश्वास करेला आ जेकर दिल अल्लाह के याद में आराम पावेला। देखऽ, अल्लाह के याद में ही दिल के आराम मिलेला।


23
Q.S अज-जुमार के ह (39:23)

اَللّٰهُ نَزَّلَ اَحْسَنَ الْحَدِيْثِ كِتٰبًا مُّتَشَابِهًا مَّثَانِيَۙ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُوْدُ الَّذِيْنَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ ۚ ثُمَّ تَلِيْنُ جُلُوْدُهُمْ وَقُلُوْبُهُمْ اِلٰى ذِكْرِ اللّٰهِ ۗذٰلِكَ هُدَى اللّٰهِ يَهْدِيْ بِهٖ مَنْ يَّشَاۤءُ ۗوَمَنْ يُّضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهٗ مِنْ هَادٍ

allāhu nazzala aḥsanal-ḥadīṡi kitābam mutasyābiham maṡāniy(a), taqsya‘irru minhu julūdul-lażīna yakhsyauna rabbahum, ṡumma talīnu julūduhum wa qulūbuhum ilā żikrillāh(i), żālika hudallāhi yahdī bihī may yasyā'(u), wa may yuḍlilillāhu famā lahū min hād(in).

अल्लाह एकही कुरान (ओकर आयत) के बेर-बेर बेहतरीन शब्द (अर्थात) उतारले बाड़े, एकरा चलते अपना रब से डेराए वाला लोग के त्वचा कांपत बाड़े, फेर अल्लाह के याद कईला प उनुकर त्वचा अवुरी दिल शांत हो जाला। इहे अल्लाह के हिदायत ह, ओह किताब से उ जेकरा के चाहेला ओकरा के मार्गदर्शन करेला। आ जेकरा के अल्लाह भटकावे देसु ओकरा के केहू मार्गदर्शन ना कर सके.


18
Q.S अल-फत के ह (48:18)

۞ لَقَدْ رَضِيَ اللّٰهُ عَنِ الْمُؤْمِنِيْنَ اِذْ يُبَايِعُوْنَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ مَا فِيْ قُلُوْبِهِمْ فَاَنْزَلَ السَّكِيْنَةَ عَلَيْهِمْ وَاَثَابَهُمْ فَتْحًا قَرِيْبًاۙ

laqad raḍiyallāhu ‘anil-mu'minīna iż yubāyi‘ūnaka taḥtasy-syajarati fa‘alima mā fī qulūbihim fa'anzalas-sakīnata ‘alaihim wa aṡābahum fatḥan qarībā(n).

सचमुच, अल्लाह मुसलमानन पर बरकत देले बाड़े जब उ लोग पेड़ के नीचे रउआ (मुहम्मद) से वफादारी कईले रहले, उ जानत रहले कि उनुका दिल में का बा तब उ ओ लोग के शांति देले अवुरी करीब जीत के इनाम देले,


26
Q.S अल-फत के ह (48:26)

اِذْ جَعَلَ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا فِيْ قُلُوْبِهِمُ الْحَمِيَّةَ حَمِيَّةَ الْجَاهِلِيَّةِ فَاَنْزَلَ اللّٰهُ سَكِيْنَتَهٗ عَلٰى رَسُوْلِهٖ وَعَلَى الْمُؤْمِنِيْنَ وَاَلْزَمَهُمْ كَلِمَةَ التَّقْوٰى وَكَانُوْٓا اَحَقَّ بِهَا وَاَهْلَهَا ۗوَكَانَ اللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيْمًا ࣖ

iż ja‘alal-lażīna kafarū fī qulūbihimul-ḥamiyyata ḥamiyyatal-jāhiliyyati fa anzalallāhu sakīnatahū ‘alā rasūlihī wa ‘alal-mu'minīna wa alzamahum kalimatat-taqwā wa kānū aḥaqqa bihā wa ahlahā, wa kānallāhu bikulli syai'in ‘alīmā(n).

जब काफिर लोग ओह लोग के दिल में अहंकार (अज्ञानता के अहंकार) पैदा कइल त अल्लाह अपना रसूलुल्लाह पर आ मुसलमानन पर शांति भेज दिहलन आ ओह लोग पर धर्मपरायणता के वचन के पालन कइल फर्ज कर दिहलन आ ऊ लोग एकर अधिका हकदार आ ओकरा लायक रहे. आ अल्लाह सब चीजन के सर्वज्ञ हवें।