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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Shalat Tempat - tempat Shalat Masjid Etika dalam masjid

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कुल आयत : 4
125
Q.S अल-बकराह के ह (2:125)

وَاِذْ جَعَلْنَا الْبَيْتَ مَثَابَةً لِّلنَّاسِ وَاَمْنًاۗ وَاتَّخِذُوْا مِنْ مَّقَامِ اِبْرٰهٖمَ مُصَلًّىۗ وَعَهِدْنَآ اِلٰٓى اِبْرٰهٖمَ وَاِسْمٰعِيْلَ اَنْ طَهِّرَا بَيْتِيَ لِلطَّاۤىِٕفِيْنَ وَالْعٰكِفِيْنَ وَالرُّكَّعِ السُّجُوْدِ

wa iż ja‘alnal-baita maṡābatal lin-nāsi wa amnā(n), wattakhiżū mim maqāmi ibrāhīma muṣallā(n), wa ‘ahidnā ilā ibrāhīma wa ismā‘īla an ṭahhirā baitiya liṭ-ṭā'ifīna wal-‘ākifīna war-rukka‘is-sujūd(i).

आ (याद रखीं), जब हमनी के घर (काबा) के लोग खातिर इकट्ठा होखे के जगह आ सुरक्षित जगह बनवनी जा। आ इब्राहिम के मकाम के नमाज के जगह बनाईं। आ हमनी के इब्राहीम आ इस्माइल के आज्ञा दिहले बानी जा कि "तवाफ करे वाला, इक्तिकाफ करे वाला, प्रणाम करे वाला आ सजदा करे वाला खातिर हमार घर साफ करऽ!"


31
Q.S अल-अ'रफ के ह (7:31)

۞ يٰبَنِيْٓ اٰدَمَ خُذُوْا زِيْنَتَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَّكُلُوْا وَاشْرَبُوْا وَلَا تُسْرِفُوْاۚ اِنَّهٗ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِفِيْنَ ࣖ

yā banī ādama khużū zīnatakum ‘inda kulli masjidiw wa kulū wasyrabū wa lā tusrifū, innahū lā yuḥibbul-musrifīn(a).

हे आदम के वंशज लोग! हर बेर जब मस्जिद में (प्रवेश) करीं, खाईं-पीईं त आपन बढ़िया कपड़ा पहिनीं, लेकिन एकरा के जादा मत करीं। सचमुच अल्लाह के अतिशयोक्ति करे वाला लोग पसंद ना होखेला।


26
Q.S अल-हज के ह (22:26)

وَاِذْ بَوَّأْنَا لِاِبْرٰهِيْمَ مَكَانَ الْبَيْتِ اَنْ لَّا تُشْرِكْ بِيْ شَيْـًٔا وَّطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّاۤىِٕفِيْنَ وَالْقَاۤىِٕمِيْنَ وَالرُّكَّعِ السُّجُوْدِ

wa iż bawwa'nā li'ibrāhīma makānal-baiti allā tusyrik bī syai'aw wa ṭahhir baitiya liṭ-ṭā'ifīna wal-qā'imīna war-rukka‘is-sujūd(i).

आ (याद रखीं), जब हमनी के इब्राहिम के अल्लाह के घर में रखले रहनी जा (ई कह के कि) "हमरा से कुछ भी शरीफ मत करीं आ तवाफ करे वाला लोग खातिर, आ इबादत करे वाला लोग खातिर आ प्रणाम करे वाला लोग खातिर हमार घर के शुद्ध करीं।"


36
Q.S एन-नूर के बा (24:36)

فِيْ بُيُوْتٍ اَذِنَ اللّٰهُ اَنْ تُرْفَعَ وَيُذْكَرَ فِيْهَا اسْمُهٗۙ يُسَبِّحُ لَهٗ فِيْهَا بِالْغُدُوِّ وَالْاٰصَالِ ۙ

fī buyūtin ażinallāhu an turfa‘a wa yużkara fīhasmuh(ū), yusabbiḥu lahū fīhā bil-guduwwi wal-āṣāl(i).

(उ रोशनी) ओह घरन में जहाँ अल्लाह अपना नाम के महिमामंडन आ उल्लेख करे के आदेश दिहले बाड़न, उहाँ सबेरे आ साँझ के उनकर नाम के महिमामंडन (पवित्र) करे के,