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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - इसलाम इस्लाम का रद्द होना मुस्लिम उम्माह के पतन का कारण बनता है कुरूप विद्वान धर्म बेचते हैं उन विद्वानों के लिए खतरा जो अपना धर्म बेचते हैं

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कुल श्लोक : 2
41
Q.S अल Baqarah (2:41)

وَاٰمِنُوْا بِمَآ اَنْزَلْتُ مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَكُمْ وَلَا تَكُوْنُوْٓا اَوَّلَ كَافِرٍۢ بِهٖ ۖ وَلَا تَشْتَرُوْا بِاٰيٰتِيْ ثَمَنًا قَلِيْلًا ۖوَّاِيَّايَ فَاتَّقُوْنِ

wa āminū bimā anzaltu muṣaddiqal limā ma‘akum wa lā takūnū awwala kāfirim bih(ī), wa lā tasytarū bi'āyātī ṡamanan qalīlā(n), wa iyyāya fattaqūn(i).

और उस (अल-कुरआन) पर विश्वास करो जो मैंने उतारा, जो उस (तौरात) की पुष्टि करता है जो तुम्हारे पास है, और इसके पहले काफिर होने वाले न बनो। मेरी आयतों को सस्ते दाम में न बेचो, और केवल मुझसे डरते रहो।


44
Q.S अल-मैदाह (5:44)

اِنَّآ اَنْزَلْنَا التَّوْرٰىةَ فِيْهَا هُدًى وَّنُوْرٌۚ يَحْكُمُ بِهَا النَّبِيُّوْنَ الَّذِيْنَ اَسْلَمُوْا لِلَّذِيْنَ هَادُوْا وَالرَّبّٰنِيُّوْنَ وَالْاَحْبَارُ بِمَا اسْتُحْفِظُوْا مِنْ كِتٰبِ اللّٰهِ وَكَانُوْا عَلَيْهِ شُهَدَاۤءَۚ فَلَا تَخْشَوُا النَّاسَ وَاخْشَوْنِ وَلَا تَشْتَرُوْا بِاٰيٰتِيْ ثَمَنًا قَلِيْلًا ۗوَمَنْ لَّمْ يَحْكُمْ بِمَآ اَنْزَلَ اللّٰهُ فَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْكٰفِرُوْنَ

innā anzalnat-taurāta fīhā hudaw wa nūr(un), yaḥkumu bihan-nabiyyūnal-lażīna aslamū lil-lażīna hādū war-rabbāniyyūna wal-aḥbāru bimastuḥfiẓū min kitābillāhi wa kānū ‘alaihi syuhadā'(a), falā takhsyawun-nāsa wakhsyauni wa lā tasytarū bi'āyātī ṡamanan qalīlā(n), wa mal lam yaḥkum bimā anzalallāhu fa ulā'ika humul-kāfirūn(a).

निश्चय ही, हमने तौरात उतारी, जिसमें हिदायत और नूर है। इसके ज़रिए नबी, जो अल्लाह के सामने सर झुकाते थे, यहूदियों के लिए फ़ैसला करते थे, और उनके उलमा और पादरी भी, क्योंकि उन्हें अल्लाह की किताबों की हिफ़ाज़त का हुक्म दिया गया था और वे इसकी गवाही देते थे। इसलिए तुम इंसानों से न डरो, बल्कि मुझसे डरो। और मेरी आयतों को सस्ते दामों में न बेचो। जो कोई अल्लाह के उतारे हुए के मुताबिक़ फ़ैसला न करे, वही लोग काफ़िर हैं।