قَالُوْا لَنْ نُّؤْثِرَكَ عَلٰى مَا جَاۤءَنَا مِنَ الْبَيِّنٰتِ وَالَّذِيْ فَطَرَنَا فَاقْضِ مَآ اَنْتَ قَاضٍۗ اِنَّمَا تَقْضِيْ هٰذِهِ الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا ۗ
qālū lan nu'ṡiraka ‘alā mā jā'anā minal-bayyināti wal-lażī faṭaranā faqḍi mā anta qāḍ(in), innamā taqḍī hāżihil-ḥayātad-dun-yā.
उन्होंने (जादूगरों ने) कहा, 'हम उन साफ़-साफ़ निशानियों के मुकाबले में तुझे तरजीह नहीं देंगे, जो हमारे पास आईं, और न ही उस (अल्लाह) को, जिसने हमें पैदा किया। तो जो तू करना चाहता है, कर ले। तू तो बस इस दुनिया की ज़िंदगी का फैसला कर सकता है।'
قَالُوْا لَا ضَيْرَ ۖاِنَّآ اِلٰى رَبِّنَا مُنْقَلِبُوْنَ ۚ
qālū lā ḍair(a), innā ilā rabbinā munqalibūn(a).
उन्होंने कहा, 'हमें कोई डर नहीं, क्योंकि हम अपने रब की ओर लौटेंगे।'
وَلَىِٕنْ سَاَلْتَهُمْ مَّنْ خَلَقَ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ لَيَقُوْلُنَّ اللّٰهُ ۗ قُلْ اَفَرَءَيْتُمْ مَّا تَدْعُوْنَ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَنِيَ اللّٰهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كٰشِفٰتُ ضُرِّهٖٓ اَوْ اَرَادَنِيْ بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكٰتُ رَحْمَتِهٖۗ قُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُ ۗعَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُوْنَ
wa la'in sa'altahum man khalaqas-samāwāti wal-arḍa layaqūlunnallāh(u), qul afara'aitum mā tad‘ūna min dūnillāhi in arādaniyallāhu biḍurrin hal hunna kāsyifātu ḍurrihī au arādanī biraḥmatin hal hunna mumsikātu raḥmatih(ī), qul ḥasbiyallāh(u), ‘alaihi yatawakkalul-mutawakkilūn(a).
और अगर तुम उनसे पूछो, 'आकाशों और धरती को किसने बनाया?' तो वे ज़रूर कहेंगे, 'अल्लाह।' कहो, 'तो क्या तुमने सोचा कि जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, अगर अल्लाह मुझे कोई नुकसान पहुँचाना चाहे, तो क्या वे उस नुकसान को हटा सकते हैं, या अगर वह मुझे रहमत देना चाहे, तो क्या वे उसकी रहमत को रोक सकते हैं?' कहो, 'मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। उसी पर तवक्कुल करने वाले भरोसा करते हैं।'
فَسَتَذْكُرُوْنَ مَآ اَقُوْلُ لَكُمْۗ وَاُفَوِّضُ اَمْرِيْٓ اِلَى اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ بَصِيْرٌ ۢبِالْعِبَادِ
fa satażkurūna mā aqūlu lakum, wa ufawwiḍu amrī ilallāh(i), innallāha baṣīrum bil-‘ibād(i).
तो तुम जल्द ही मेरी कही बात को याद करोगे। और मैं अपना मामला अल्लाह के हवाले करता हूँ। निश्चित रूप से, अल्लाह अपने बन्दों को बहुत अच्छे से देखता है।