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Q.S अत-तौबाह (9:84)
وَلَا تُصَلِّ عَلٰٓى اَحَدٍ مِّنْهُمْ مَّاتَ اَبَدًا وَّلَا تَقُمْ عَلٰى قَبْرِهٖۗ اِنَّهُمْ كَفَرُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖ وَمَاتُوْا وَهُمْ فٰسِقُوْنَ
wa lā tuṣalli ‘alā aḥadim minhum māta abadaw wa lā taqum ‘alā qabrih(ī), innahum kafarū billāhi wa rasūlihī wa mātū wa hum fāsiqūn(a).
आ की अहाँ (मुहम्मद) ककरो लेल दुआ नहि करू जे हुनका (पाखंडी) मे मरि जाय, कहियो आ ओकर कब्र पर ठाढ़ (नमाज) नहि करू। सचमुच, ओ सब अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह के काफिर केलक आ ओ सब दुष्टता के अवस्था में मरि गेल
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Q.S अल-जिन (72:18)
وَّاَنَّ الْمَسٰجِدَ لِلّٰهِ فَلَا تَدْعُوْا مَعَ اللّٰهِ اَحَدًاۖ
wa annal-masājida lillāhi falā tad‘ū ma‘allāhi aḥadā(n).
आ सचमुच मस्जिद अल्लाह के लेल छै। तेँ एहि मे अल्लाह के अलावा कोनो चीज के इबादत नहि करू।