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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - इसलाम इस्लाम का रद्द होना मुस्लिम उम्माह के पतन का कारण बनता है यह सोचकर कि मानव पक्ष पर आशीर्वाद है, जब ईश्वर ही आशीर्वाद देता है

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कुल श्लोक : 3
96
Q.S अल-आराफ़ (7:96)

وَلَوْ اَنَّ اَهْلَ الْقُرٰٓى اٰمَنُوْا وَاتَّقَوْا لَفَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَرَكٰتٍ مِّنَ السَّمَاۤءِ وَالْاَرْضِ وَلٰكِنْ كَذَّبُوْا فَاَخَذْنٰهُمْ بِمَا كَانُوْا يَكْسِبُوْنَ

wa lau anna ahlal-qurā āmanū wattaqau lafataḥnā ‘alaihim barakātim minas-samā'i wal ardḍi wa lākin każżabū fa akhażnāhum bimā kānū yaksibūn(a).

और अगर नगर के लोग ईमान लाते और तक़वा अपनाते, तो हम निश्चित रूप से उनके लिए आकाश और धरती से बरकतें खोल देते, लेकिन उन्होंने (हमारी आयतों को) झुठलाया, तो हमने उन्हें उनके किए कर्मों के अनुसार सजा दी।


73
Q.S कनटोप (11:73)

قَالُوْٓا اَتَعْجَبِيْنَ مِنْ اَمْرِ اللّٰهِ رَحْمَتُ اللّٰهِ وَبَرَكٰتُهٗ عَلَيْكُمْ اَهْلَ الْبَيْتِۗ اِنَّهٗ حَمِيْدٌ مَّجِيْدٌ

qālū ata‘jabīna min amrillāhi raḥmatullāhi wa barakātuh(ū), ‘alaikum ahlal-bait(i), innahū ḥamīdum majīd(un).

उन्होंने (फ़रिश्तों ने) कहा, 'क्या तुम अल्लाह के आदेश पर आश्चर्य करती हो? यह अल्लाह की रहमत और आशीर्वाद है, जो तुम पर, हे अहलेबैत, बरसाया गया है! निश्चय ही अल्लाह बहुत प्रशंसनीय, बहुत दयालु है।'


30
Q.S अल-क़सस (28:30)

فَلَمَّآ اَتٰىهَا نُوْدِيَ مِنْ شَاطِئِ الْوَادِ الْاَيْمَنِ فِى الْبُقْعَةِ الْمُبٰرَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ اَنْ يّٰمُوْسٰىٓ اِنِّيْٓ اَنَا اللّٰهُ رَبُّ الْعٰلَمِيْنَ ۙ

falammā atāhā nūdiya min syāṭi'il wādil aimani fil buq‘atil mubārakati minasy syajarati ay yā mūsā innī anallāhu rabbul-‘ālamīn(a).

तो जब वह (मूसा) उस आग के पास पहुँचा, उसे दाहिनी तरफ़ की वादी के किनारे, एक बरकत वाली ज़मीन पर, एक दरख़्त से पुकारा गया, 'ऐ मूसा! बेशक, मैं अल्लाह हूँ, सारे जहानों का रब!'