وَلَوْ اَنَّ اَهْلَ الْقُرٰٓى اٰمَنُوْا وَاتَّقَوْا لَفَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَرَكٰتٍ مِّنَ السَّمَاۤءِ وَالْاَرْضِ وَلٰكِنْ كَذَّبُوْا فَاَخَذْنٰهُمْ بِمَا كَانُوْا يَكْسِبُوْنَ
wa lau anna ahlal-qurā āmanū wattaqau lafataḥnā ‘alaihim barakātim minas-samā'i wal ardḍi wa lākin każżabū fa akhażnāhum bimā kānū yaksibūn(a).
आ जँ ओहि देशक लोक सभ विश्वास कएने रहितथि आ धर्मात्मा रहितथि तँ हम सभ ओकरा सभ केँ आकाश आ पृथ्वी सँ आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा ओ सभ झूठ निकलल (हमर सभक श्लोक), तेँ हम सभ ओकरा सभ केँ ओकर सभक काजक अनुसार सजा देलियैक।
فَاِذَا بَلَغْنَ اَجَلَهُنَّ فَاَمْسِكُوْهُنَّ بِمَعْرُوْفٍ اَوْ فَارِقُوْهُنَّ بِمَعْرُوْفٍ وَّاَشْهِدُوْا ذَوَيْ عَدْلٍ مِّنْكُمْ وَاَقِيْمُوا الشَّهَادَةَ لِلّٰهِ ۗذٰلِكُمْ يُوْعَظُ بِهٖ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ ەۗ وَمَنْ يَّتَّقِ اللّٰهَ يَجْعَلْ لَّهٗ مَخْرَجًا ۙ
fa iżā balagna ajalahunna fa amsikūhunna bima‘rūfin au fāriqūhunna bima‘rūfiw wa asyhidū żawai ‘adlim minkum wa aqīmusy-syahādata lillāh(i), żālikum yū‘aẓu bihī man kāna yu'minu billāhi wal-yaumil-ākhir(i), wa may yattaqillāha yaj‘al lahū makhrajā(n).
त जखन ओ सब अपन नमाज के अंत के नजदीक आबि रहल छथि तखन हुनका सब के नीक स मेल मिलाप (वापिस) करू या हुनका सब के नीक स जाय दियौ आ अहाँ सब में दू गोट निष्पक्ष गवाह के संग गवाही देबय दियौ आ अल्लाह के लेल अहाँक गवाही स्थापित भ जाय। इहे शिक्षा छै जे अल्लाह आरू परलोक में विश्वास करै वाला के देलऽ जाय छै । जे कियो अल्लाह स डरैत अछि ओ निश्चित रूप स ओकरा लेल एकटा रास्ता खोलत,
وَّيَرْزُقْهُ مِنْ حَيْثُ لَا يَحْتَسِبُۗ وَمَنْ يَّتَوَكَّلْ عَلَى اللّٰهِ فَهُوَ حَسْبُهٗ ۗاِنَّ اللّٰهَ بَالِغُ اَمْرِهٖۗ قَدْ جَعَلَ اللّٰهُ لِكُلِّ شَيْءٍ قَدْرًا
wa yarzuqhu min ḥaiṡu lā yaḥtasib(u), wa may yatawakkal ‘alallāhi fa huwa ḥasbuh(ū), innallāha bāligu amrih(ī), qad ja‘alallāhu likulli syai'in qadrā(n).
आ ओ ओकरा ओहि दिशासँ रोजी-रोटी देलक जकर आशा ओकरा नहि छलैक। आ जे कियो अल्लाह पर भरोसा करत, अल्लाह ओकर (जरूरत) जरूर पूरा करत। सचमुच अल्लाह अपन काज के अंजाम दैत छथि। सचमुच अल्लाह सब किछु के रियायत केने छथि।