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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - इसलाम इस्लाम का रद्द होना मुस्लिम उम्माह के पतन का कारण बनता है विधर्म विधर्मियों को धमकी

श्लोक खोज परिणाम :
कुल श्लोक : 2
153
Q.S अल-अनआम (6:153)

وَاَنَّ هٰذَا صِرَاطِيْ مُسْتَقِيْمًا فَاتَّبِعُوْهُ ۚوَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيْلِهٖ ۗذٰلِكُمْ وَصّٰىكُمْ بِهٖ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُوْنَ

wa anna hāżā ṣirāṭī mustaqīman fattabi‘ūh(u), wa lā tattabi‘us-subula fa tafarraqa bikum ‘an sabīlih(ī), żālikum waṣṣākum bihī la‘allakum tattaqūn(a).

और निश्चय ही, यही मेरा रास्ता है, जो सीधा है। तो इसका अनुसरण करो! और दूसरी राहों का अनुसरण न करो जो तुम्हें उसके रास्ते से भटका दें। यही वह है जो उसने तुम्हें हुक्म दिया ताकि तुम तक़वा अपनाओ।


63
Q.S एक-नूर (24:63)

لَا تَجْعَلُوْا دُعَاۤءَ الرَّسُوْلِ بَيْنَكُمْ كَدُعَاۤءِ بَعْضِكُمْ بَعْضًاۗ قَدْ يَعْلَمُ اللّٰهُ الَّذِيْنَ يَتَسَلَّلُوْنَ مِنْكُمْ لِوَاذًاۚ فَلْيَحْذَرِ الَّذِيْنَ يُخَالِفُوْنَ عَنْ اَمْرِهٖٓ اَنْ تُصِيْبَهُمْ فِتْنَةٌ اَوْ يُصِيْبَهُمْ عَذَابٌ اَلِيْمٌ

lā taj‘alū du‘ā'ar-rasūli bainakum kadu‘ā'i ba‘ḍikum ba‘ḍā(n), qad ya'lamullāhul-lażīna yatasallalūna minkum liwāżā(n), falyaḥżaril-lażīna yukhālifūna ‘an amrihī an tuṣībahum fitnatun au yuṣībahum ‘ażābun alīm(un).

रसूल (मुहम्मद) को तुममें से एक-दूसरे की तरह पुकारने की आदत न डालो। निश्चित रूप से, अल्लाह उन लोगों को जानता है जो तुममें से छुपकर (दूसरों की आड़ में) निकल जाते हैं, तो जो लोग रसूल के हुक्म की नाफरमानी करते हैं, उन्हें डरना चाहिए कि उन पर कोई आज़माइश आएगी या उन्हें दर्दनाक अज़ाब भुगतना पड़ेगा।