اِنَّ اللّٰهَ لَا يَغْفِرُ اَنْ يُّشْرَكَ بِهٖ وَيَغْفِرُ مَا دُوْنَ ذٰلِكَ لِمَنْ يَّشَاۤءُ ۚ وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدِ افْتَرٰٓى اِثْمًا عَظِيْمًا
innallāha lā yagfiru ay yusyraka bihī wa yagfiru mā dūna żālika limay yasyā'(u), wa may yusyrik billāhi fa qadiftarā iṡman ‘aẓīmā(n).
दरअसल, अल्लाह अपना (शिर्क) के साथी (शिर्क) करे के (पाप) ना माफ करीहे, अवुरी उ जेकरा के चाहेला ओकरा खाती (शिर्क) के अलावे अवुरी (पाप) माफ क देले। जे भी अल्लाह के साथ साझीदारी करेला, उ वाकई में बहुत बड़ पाप कईले बा।
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَغْفِرُ اَنْ يُّشْرَكَ بِهٖ وَيَغْفِرُ مَا دُوْنَ ذٰلِكَ لِمَنْ يَّشَاۤءُ ۗ وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلٰلًا ۢ بَعِيْدًا
innallāha lā yagfiru ay yusyraka bihī wa yagfiru mā dūna żālika limay yasyā'(u), wa may yusyrik billāhi faqad ḍalla ḍalālam ba‘īdā(n).
अल्लाह शिर्क (अल्लाह के साथी के कवनो चीज़ से जोड़ल) के पाप ना माफ करीहे, अवुरी उ जेकरा खाती चाहस ओकरा अलावे अवुरी पाप के माफ क देवेले। आ जे भी अल्लाह से (कुछ) शरीफ करेला, त साँचहू ऊ बहुत दूर भटक गइल बा।
لَقَدْ كَفَرَ الَّذِيْنَ قَالُوْٓا اِنَّ اللّٰهَ هُوَ الْمَسِيْحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۗوَقَالَ الْمَسِيْحُ يٰبَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ اعْبُدُوا اللّٰهَ رَبِّيْ وَرَبَّكُمْ ۗاِنَّهٗ مَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللّٰهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوٰىهُ النَّارُ ۗوَمَا لِلظّٰلِمِيْنَ مِنْ اَنْصَارٍ
laqad kafaral-lażīna qālū innallāha huwal-masīḥubnu maryam(a), wa qālal-masīḥu yā banī isrā'īla‘budullāha rabbī wa rabbakum, innahū may yusyrik billāhi faqad ḥarramallāhu ‘alaihil-jannata wa ma'wāhun nār(u), wa mā liẓ-ẓālimīna min anṣār(in).
सचहूँ जे लोग कहत बा कि "वास्तव में अल्लाह मरियम के बेटा मसीहा हउवें, ऊ लोग काफिर हो गइल बा." भले ही अल-मसीह (खुद) कहले रहले कि, "हे इजराइल के संतान! अल्लाह, हमार रब अवुरी अपना रब के पूजा करीं।" दरअसल, जे अल्लाह के साथ (कुछ भी चीज़) करेला, त सचमुच अल्लाह ओकरा से स्वर्ग के मना क देले बाड़े अवुरी ओकर जगह नरक बा। आ अन्यायी लोग खातिर कवनो सहायक नइखे.
ذٰلِكَ هُدَى اللّٰهِ يَهْدِيْ بِهٖ مَنْ يَّشَاۤءُ مِنْ عِبَادِهٖ ۗوَلَوْ اَشْرَكُوْا لَحَبِطَ عَنْهُمْ مَّا كَانُوْا يَعْمَلُوْنَ
Żālika hudallāhi yahdī bihī may yasyā'u min ‘ibādih(ī), wa lau asyrakū laḥabiṭa ‘anhum mā kānū ya‘malūn(a).
इहे अल्लाह के हिदायत ह, एकरा संगे उ अपना सेवकन में से केहु के हिदायत देवेले, जेकरा के उ चाहस। अगर उ लोग अल्लाह के साथ साझीदारी करीहे त उ लोग जवन अच्छा काम कईले बाड़े उ जरूर गायब हो जाई।
حُنَفَاۤءَ لِلّٰهِ غَيْرَ مُشْرِكِيْنَ بِهٖۗ وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَكَاَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاۤءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ اَوْ تَهْوِيْ بِهِ الرِّيْحُ فِيْ مَكَانٍ سَحِيْقٍ
Ḥunafā'a lillāhi gaira musyrikīna bih(ī), wa may yusyrik billāhi fa ka'annamā kharra minas-samā'i fa takhṭafuhuṭ-ṭairu au tahwī bihir-rīḥu fī makānin saḥīq(in).
(इबादत) अल्लाह के ईमानदारी से, बिना उनकर साथी कइले। जे भी अल्लाह के साथी करी त अइसन होई जइसे आसमान से गिर के कवनो चिरई छीन लेले होखे, भा हवा से दूर के जगह ले जाइल जाव।
وَاِذْ قَالَ لُقْمٰنُ لِابْنِهٖ وَهُوَ يَعِظُهٗ يٰبُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللّٰهِ ۗاِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيْمٌ
wa iż qāla luqmānu libnihī wa huwa ya‘iẓuhū yā bunayya lā tusyrik billāh(i), innasy-syirka laẓulmun ‘aẓīm(un).
आ (याद राखीं) जब लुकमान अपना बेटा से कहले रहले, जब ऊ ओकरा के एगो सबक सिखवले रहले कि, "हे हमार बेटा! अल्लाह के साथी मत करीं, वाकई में (अल्लाह) से साझीदार बनावल वाकई में बहुत बड़ अन्याय बा।"
اِنَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْ اَهْلِ الْكِتٰبِ وَالْمُشْرِكِيْنَ فِيْ نَارِ جَهَنَّمَ خٰلِدِيْنَ فِيْهَاۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمْ شَرُّ الْبَرِيَّةِۗ
innal-lażīna kafarū min ahlil-kitābi wal-musyrikīna fī nāri jahannama khālidīna fīhā, ulā'ika hum syarrul-bariyyah(ti).
दरअसल, जे लोग किताब के लोग आ मुश्रिकन में से काफिर करी, ऊ लोग नरक में (प्रवेश करी); उ लोग हमेशा खातिर ओहि में टिकल रहीहे। प्राणी के समान दुष्ट बाड़े।