وَلَا تَدْعُ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَۘ لَآ اِلٰهَ اِلَّا هُوَۗ كُلُّ شَيْءٍ هَالِكٌ اِلَّا وَجْهَهٗ ۗ لَهُ الْحُكْمُ وَاِلَيْهِ تُرْجَعُوْنَ ࣖ
wa lā tad‘u ma‘allāhi ilāhan ākhar(a), lā ilāha illā huw(a), kullu syai'in hālikun illā wajhah(ū), lahul-ḥukmu wa ilaihi turja‘ūn(a).
और अल्लाह के साथ किसी और ख़ुदा को न पुकार। उसके सिवा कोई ख़ुदा नहीं। हर चीज़ फ़ानी है, सिवाय अल्लाह के। उसी का हुक्म है, और उसी की तरफ़ तुम लौटाए जाओगे।
اِنَّكَ مَيِّتٌ وَّاِنَّهُمْ مَّيِّتُوْنَ ۖ
innaka mayyituw wa innahum mayyitūn(a).
निश्चित रूप से, तुम (ऐ मुहम्मद) मरने वाले हो और वे भी मरने वाले हैं।
كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍۖ
kullu man ‘alaihā fān(in).
ज़मीन पर जो कुछ भी है वह नष्ट हो जाएगा,
وَّيَبْقٰى وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلٰلِ وَالْاِكْرَامِۚ
wa yabqā wajhu rabbika żul-jalāli wal-ikrām(i).
लेकिन तुम्हारे रब का चेहरा, जो महानता और सम्मान का मालिक है, हमेशा रहेगा,