وَاِذْ قُلْنَا لَكَ اِنَّ رَبَّكَ اَحَاطَ بِالنَّاسِۗ وَمَا جَعَلْنَا الرُّءْيَا الَّتِيْٓ اَرَيْنٰكَ اِلَّا فِتْنَةً لِّلنَّاسِ وَالشَّجَرَةَ الْمَلْعُوْنَةَ فِى الْقُرْاٰنِ ۗ وَنُخَوِّفُهُمْۙ فَمَا يَزِيْدُهُمْ اِلَّا طُغْيَانًا كَبِيْرًا ࣖ
wa iż qulnā laka inna rabbaka aḥāṭa bin-nās(i), wa mā ja‘alnar-ru'yal-latī araināka illā fitnatal lin-nāsi wasy-syajaratal mal‘ūnata fil-qur'ān(i), wa nukhawwifuhum, famā yazīduhum illā ṭugyānan kabīrā(n).
आ (याद राखीं) जब हमनी के रउरा पर प्रकट कइले बानी जा कि, "वास्तव में, राउर रब के (ज्ञान) सभ मनुष्य के ढंक लेला।" आ हमनी के उ सपना ना बनवनी जा जवन हमनी के रउआ के देखवले बानी जा, बल्कि इंसान खातिर परीक्षा के रूप में बनवनी जा आ (ओही तरे) कुरान में शापित पेड़ (जक्कुम) खातिर। आ हमनी के ओह लोग के डेरा दिहनी जा, बाकिर एहसे ओह लोग के आज्ञा ना माने में अउरी बढ़ोतरी भइल.
فَاَوْحٰىٓ اِلٰى عَبْدِهٖ مَآ اَوْحٰىۗ
fa auḥā ilā ‘abdihī mā auḥā.
एकरा बाद उ अपना सेवक (मुहम्मद) तक अल्लाह जवन उतारले रहले, ओकरा के पहुंचवले।
اَفَتُمٰرُوْنَهٗ عَلٰى مَا يَرٰى
afa tumārūnahū ‘alā mā yarā.
त का रउआ (मक्का के मुशरिक) उनुका से विवाद कईल चाहतानी कि उ जवन देखले बाड़े?