يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اَوْفُوْا بِالْعُقُوْدِۗ اُحِلَّتْ لَكُمْ بَهِيْمَةُ الْاَنْعَامِ اِلَّا مَا يُتْلٰى عَلَيْكُمْ غَيْرَ مُحِلِّى الصَّيْدِ وَاَنْتُمْ حُرُمٌۗ اِنَّ اللّٰهَ يَحْكُمُ مَا يُرِيْدُ
yā ayyuhal-lażīna āmanū aufū bil-‘uqūd(i), uḥillat lakum bahīmatul-an‘āmi illā mā yutlā ‘alaikum gaira muḥilliṣ-ṣaidi wa antum ḥurum(un), innallāha yaḥkumu mā yurīd(u).
हे विश्वास करनिहार! वादा पूरा करू। पशुधन अहाँक लेल जायज अछि, सिवाय जकर उल्लेख अहाँ केँ कयल जायत, आ जखन अहाँ इहराम (हज वा उमरा) मे छी तखन शिकार करबाक अनुमति नहि अछि | सचमुच अल्लाह जे चाहै छै ओकर अनुसार कानून तय करै छै।
يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تُحِلُّوْا شَعَاۤىِٕرَ اللّٰهِ وَلَا الشَّهْرَ الْحَرَامَ وَلَا الْهَدْيَ وَلَا الْقَلَاۤىِٕدَ وَلَآ اٰۤمِّيْنَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ يَبْتَغُوْنَ فَضْلًا مِّنْ رَّبِّهِمْ وَرِضْوَانًا ۗوَاِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُوْا ۗوَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ اَنْ صَدُّوْكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اَنْ تَعْتَدُوْاۘ وَتَعَاوَنُوْا عَلَى الْبِرِّ وَالتَّقْوٰىۖ وَلَا تَعَاوَنُوْا عَلَى الْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِ ۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗاِنَّ اللّٰهَ شَدِيْدُ الْعِقَابِ
yā ayyuhal-lażīna āmanū lā tuḥillū sya‘ā'irallāhi wa lasy-syahral-ḥarāma wa lal-hadya wa lal-qalā'ida wa lā āmmīnal-baital-ḥarāma yabtagūna faḍlam mir rabbihim wa riḍwānā(n), wa iżā ḥalaltum faṣṭādū, wa lā yajrimannakum syana'ānu qaumin an ṣaddūkum ‘anil- asjidil-ḥarāmi an ta‘tadū, wa ta‘āwanū ‘alal-birri wat-taqwā, wa lā ta‘āwanū ‘alal-iṡmi wal-‘udwān(i), wattaqullāh(a), innallāha syadīdul-‘iqāb(i).
हे विश्वास करनिहार! अल्लाह के पवित्र सिद्धांत के उल्लंघन नै करू, आ हरम महीना के (इज्जत के उल्लंघन) नै करू, हदीयू (बलिदान के जानवर) आ कलाईद (चिह्नित बलिदान के जानवर) के (परेशान नै करू), आ बैतुलहरम में आबय वाला लोक के (साथ) परेशान नै करू; ओ सभ अपन प्रभुक कृपा आ प्रसन्नताक खोज करैत छथि | मुदा जँ इहराम पूरा क' लेने छी तखन शिकार भ' सकैत अछि। कोनो लोक के प्रति (अपन) घृणा नै होबय दियौक कियाक त ओ अहाँ के पवित्र मस्जिद स बाहर निकलय स रोकैत अछि, अहाँ के अपन सीमा स बाहर (हुनका दिस) जेबाक लेल प्रोत्साहित करैत अछि | आ धर्म आ धर्मपरायणता (करबा मे) अहाँक सहायता करू, आ पाप आ वैरभाव करबा मे अहाँक सहायता नहि करू। अल्लाह स डरू, सचमुच अल्लाह सजा मे बहुत कठोर छथि।
يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَيَبْلُوَنَّكُمُ اللّٰهُ بِشَيْءٍ مِّنَ الصَّيْدِ تَنَالُهٗٓ اَيْدِيْكُمْ وَرِمَاحُكُمْ لِيَعْلَمَ اللّٰهُ مَنْ يَّخَافُهٗ بِالْغَيْبِۚ فَمَنِ اعْتَدٰى بَعْدَ ذٰلِكَ فَلَهٗ عَذَابٌ اَلِيْمٌ
yā ayyuhal-lażīna āmanū layabluwannakumullāhu bisyai'im minaṣ-ṣaidi tanāluhū aidīkum wa rimāḥukum liya‘lamallāhu may yakhāfuhū bil-gaib(i), fa mani‘tadā ba‘da żālika fa lahū ‘ażābun alīm(un).
हे विश्वास करनिहार! अल्लाह अहाँ के खेल स जरूर परखताह जेकरा अहाँ हाथ आ भाला स आसानी स पकड़ि सकैत छी, ताकि हुनका पता चलय जे हुनका स के डरैत अछि, हालांकि ओ हुनका नहि देख सकैत छथि। तकर बाद जे उल्लंघन करत ओकरा कष्टदायक सजा भेटतैक।
يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تَقْتُلُوا الصَّيْدَ وَاَنْتُمْ حُرُمٌ ۗوَمَنْ قَتَلَهٗ مِنْكُمْ مُّتَعَمِّدًا فَجَزَۤاءٌ مِّثْلُ مَا قَتَلَ مِنَ النَّعَمِ يَحْكُمُ بِهٖ ذَوَا عَدْلٍ مِّنْكُمْ هَدْيًاۢ بٰلِغَ الْكَعْبَةِ اَوْ كَفَّارَةٌ طَعَامُ مَسٰكِيْنَ اَوْ عَدْلُ ذٰلِكَ صِيَامًا لِّيَذُوْقَ وَبَالَ اَمْرِهٖ ۗعَفَا اللّٰهُ عَمَّا سَلَفَ ۗوَمَنْ عَادَ فَيَنْتَقِمُ اللّٰهُ مِنْهُ ۗوَاللّٰهُ عَزِيْزٌ ذُو انْتِقَامٍ
yā ayyuhal-lażīna āmanū lā taqtuluṣ-ṣaida wa antum ḥurum(un), wa man qatalahū minkum muta‘ammidan fa jazā'um miṡlu mā qatala minan-na‘ami yaḥkumu bihī żawā ‘adlim minkum hadyam bāligal-ka‘bati au kaffāratun ṭa‘āmu masākīna au ‘adlu żālika ṣiyāmal liyażūqa wabāla amrih(ī), ‘afallāhu ‘ammā salaf(a), wa man ‘āda fa yantaqimullāhu minh(u), wallāhu ‘azīzun żuntiqām(in).
हे विश्वास करनिहार! इहराम (हज या उमरा) मे रहैत शिकार जानवर के नहि मारू। अहाँ सभ मे सँ जे कियो ओकरा जानबूझि क' मारि दैत अछि, तखन जुर्माना अछि जे ओकर बदला मे ओकर मारल गेल खेलक अनुपात मे माल-जाल लगाओल जाय, अहाँ सभ मे दू टा न्यायी लोकक निर्णयक अनुसार जे हद्यू के रूप मे क'बा मे ल' जायब, वा कफरत (फिरौती द' क') गरीब सभ केँ खुआ क', वा उपवास, बाहर निकालल गेल भोजनक अनुपात मे, जाहि सँ ओकरा अपन काजक खराब परिणामक अहसास हो. अल्लाह पहिने जे भेल छल ओकरा माफ क देने छथि। आ जे कियो एहि काज मे वापस आबि जायत, ओकरा अल्लाह जरूर सजा देत। आ अल्लाह, सर्वशक्तिमान, यातना देबय के (शक्ति) रखैत छथि।
اُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ الْبَحْرِ وَطَعَامُهٗ مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِ ۚوَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ الْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًا ۗوَاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذِيْٓ اِلَيْهِ تُحْشَرُوْنَ
uḥilla lakum ṣaidul-baḥri wa ṭa‘āmuhū matā‘al lakum wa lis-sayyārah(ti), wa ḥurrima ‘alaikum ṣaidul-barri mā dumtum ḥurumā(n), wattaqullāhal-lażī ilaihi tuḥsyarūn(a).
समुद्री जानवर आ समुद्र सं (उत्पन्न) भोजनक शिकार करब अहाँक लेल, आ यात्रा करयवला लोकनिक लेल स्वादिष्ट भोजनक रूप मे करब जायज अछि; आ अहाँ सभक लेल जमीनक जानवर (पकड़ब) मना अछि, जाबत धरि अहाँ इहराम मे छी। आ अल्लाह सँ डरू जिनका लग अहाँ सभ (पुनः) जमा भ’ जायब।