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Q.S एक-नाज़म (53:15)
عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوٰىۗ
‘indahā jannatul-ma'wā.
जो जन्नतुल मअवा (रहने की जन्नत) के करीब है,
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Q.S एक-नाज़म (53:16)
اِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشٰىۙ
iż yagsyas-sidrata mā yagsyā.
जब सिदरतुल मुन्तहा को (प्रकाश और रहस्यों ने) ढक लिया था,
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Q.S एक-नाज़म (53:17)
مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغٰى
mā zāgal-baṣaru wa mā ṭagā.
उसकी (मुहम्मद की) नज़र न तो भटकी और न हद से आगे बढ़ी,
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Q.S एक-नाज़म (53:18)
لَقَدْ رَاٰى مِنْ اٰيٰتِ رَبِّهِ الْكُبْرٰى
laqad ra'ā min āyāti rabbihil-kubrā.
निश्चय ही, उसने अपने रब की सबसे बड़ी निशानियों में से कुछ देखीं,