اِنَّ الَّذِيْنَ يُبَايِعُوْنَكَ اِنَّمَا يُبَايِعُوْنَ اللّٰهَ ۗيَدُ اللّٰهِ فَوْقَ اَيْدِيْهِمْ ۚ فَمَنْ نَّكَثَ فَاِنَّمَا يَنْكُثُ عَلٰى نَفْسِهٖۚ وَمَنْ اَوْفٰى بِمَا عٰهَدَ عَلَيْهُ اللّٰهَ فَسَيُؤْتِيْهِ اَجْرًا عَظِيْمًا ࣖ
innal-lażīna yubāyi‘ūnaka innamā yubāyi‘ūnallāh(a), yadullāhi fauqa aidīhim, faman nakaṡa fa'innamā yankuṡu ‘alā nafsih(ī), wa man aufā bimā ‘āhada ‘alaihullāha fa sayu'tīhi ajran ‘aẓīmā(n).
कि जे लोग तोरा (मुहम्मद) के प्रति वफादारी करै छै, वास्तव में वू केवल अल्लाह के प्रति वफादारी करै छै । अल्लाह के हाथ हुनका लोकनिक हाथ पर छनि, तें जे कोनो वादा तोड़ैत अछि, तखन सचमुच ओ अपन (वादा) तोड़ैत अछि; आ जे कियो अल्लाह सँ अपन वादा पूरा करत, ओकरा एकटा पैघ इनाम देत।
۞ لَقَدْ رَضِيَ اللّٰهُ عَنِ الْمُؤْمِنِيْنَ اِذْ يُبَايِعُوْنَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ مَا فِيْ قُلُوْبِهِمْ فَاَنْزَلَ السَّكِيْنَةَ عَلَيْهِمْ وَاَثَابَهُمْ فَتْحًا قَرِيْبًاۙ
laqad raḍiyallāhu ‘anil-mu'minīna iż yubāyi‘ūnaka taḥtasy-syajarati fa‘alima mā fī qulūbihim fa'anzalas-sakīnata ‘alaihim wa aṡābahum fatḥan qarībā(n).
सचमुच अल्लाह मुसलमान सब पर बरकत देने छथि जखन ओ सब गाछ के नीचा अहाँ (मुहम्मद) के प्रति वफादारी के प्रण केने छलाह, हुनका पता छल जे हुनकर दिल में की छल तखन हुनका सब के शांति देलखिन आ हुनका सब के लगभग जीत के इनाम देलखिन,
وَّمَغَانِمَ كَثِيْرَةً يَّأْخُذُوْنَهَا ۗ وَكَانَ اللّٰهُ عَزِيْزًا حَكِيْمًا
wa magānima kaṡīratay ya'khużūnahā, wa kānallāhu ‘azīzan ḥakīmā(n).
आ युद्धक प्रचुर लूट हुनका सभ केँ भेटतनि। आ अल्लाह सर्वशक्तिमान, सर्वबुद्धिमान छथि।
وَعَدَكُمُ اللّٰهُ مَغَانِمَ كَثِيْرَةً تَأْخُذُوْنَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هٰذِهٖ وَكَفَّ اَيْدِيَ النَّاسِ عَنْكُمْۚ وَلِتَكُوْنَ اٰيَةً لِّلْمُؤْمِنِيْنَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيْمًاۙ
wa‘adakumullāhu magānima kaṡīratan ta'khużūnahā fa‘ajjala lakum hāżihī wa kaffa aidiyan-nāsi ‘ankum, wa litakūna āyatal lil-mu'minīna wa yahdiyakum ṣirāṭam mustaqīmā(n).
अल्लाह अहाँ स बहुत रास युद्ध लूट के वादा केने छलाह जे अहाँ ल सकैत छी, ताहि लेल ओ अहाँ के लेल एहि (युद्ध के लूट) के जल्दी क देलखिन आ ओ अहाँ के (नष्ट) स मनुष्य के हाथ के रोकलखिन (जाहि स अहाँ हुनकर आभारी रहब) आ ताकि ई मुसलमान के लेल एकटा प्रमाण बनि जाय आ ताकि ओ अहाँ के सीधा रास्ता पर मार्गदर्शन करथि।