وَمَا مُحَمَّدٌ اِلَّا رَسُوْلٌۚ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِ الرُّسُلُ ۗ اَفَا۟ىِٕنْ مَّاتَ اَوْ قُتِلَ انْقَلَبْتُمْ عَلٰٓى اَعْقَابِكُمْ ۗ وَمَنْ يَّنْقَلِبْ عَلٰى عَقِبَيْهِ فَلَنْ يَّضُرَّ اللّٰهَ شَيْـًٔا ۗوَسَيَجْزِى اللّٰهُ الشّٰكِرِيْنَ
wa mā muḥammadun illā rasūl(un), qad khalat min qablihir-rusul(u), afa'im māta au qutilanqalabtum ‘alā a‘qābikum, wa may yanqalib ‘alā ‘aqibaihi falay yaḍurrallāha syai'ā(n), wa sayajzillāhusy-syākirīn(a).
आ मुहम्मद मात्र एकटा रसूलुल्लाह छलाह; पहिने कतेको प्रेरित सभक निधन भ' गेल छलनि। जँ ओ मरि जायत वा मारल जायत तँ की अहाँ पाछू घुरि जायब (धर्मत्यागी)? जे पाछू घुमि जायत ओ अल्लाह के कनिको नुकसान नहि करत। अल्लाह हुनका इनाम देथिन जे आभारी छथि।
اَوَلَمَّآ اَصَابَتْكُمْ مُّصِيْبَةٌ قَدْ اَصَبْتُمْ مِّثْلَيْهَاۙ قُلْتُمْ اَنّٰى هٰذَا ۗ قُلْ هُوَ مِنْ عِنْدِ اَنْفُسِكُمْ ۗ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
awa lammā aṣābatkum muṣībatun qad aṣabtum miṡlaihā, qultum annā hāżā, qul huwa min ‘indi anfusikum, innallāha ‘alā kulli syai'in qadīr(un).
आ जखन कोनो विपत्ति (उहुद मे हार) अहाँ पर आबि जाइत अछि तखन अहाँ केँ आश्चर्य किएक होइत अछि, जखन कि अहाँ बदर मे अपन दुश्मन पर दू गुना बेसी विपत्ति पहुँचा देने छी? अहाँ कहैत छी, “ई (हार) कतय सँ आयल?” कहू, “ई अहाँ सभ सँ अछि।” सचमुच अल्लाह के सब चीज पर अधिकार छै।
وَمَآ اَصَابَكُمْ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعٰنِ فَبِاِذْنِ اللّٰهِ وَلِيَعْلَمَ الْمُؤْمِنِيْنَۙ
wa mā aṣābakum yaumal-taqal-jam‘āni fa bi'iżnillāhi wa liya‘lamal-mu'minīn(a).
आ जखन दुनू सेना के भेंट भेल छल तखन अहाँ पर जे भेल से अल्लाह के अनुमति पर छल, आ अल्लाह ओहि लोक के परखय जे सच्चा मुसलमान छल।