وَلَقَدْ كُنْتُمْ تَمَنَّوْنَ الْمَوْتَ مِنْ قَبْلِ اَنْ تَلْقَوْهُۖ فَقَدْ رَاَيْتُمُوْهُ وَاَنْتُمْ تَنْظُرُوْنَ ࣖ
wa laqad kuntum tamannaunal-mauta min qabli an talqauh(u), faqad ra'aitumūhu wa antum tanẓurūn(a).
और तुम शहादत की तमन्ना करते थे, इससे पहले कि तुम उसका सामना करो; तो (अब) तुमने उसे देख लिया और तुम उसे देख रहे हो।
۞ اِذْ تُصْعِدُوْنَ وَلَا تَلْوٗنَ عَلٰٓى اَحَدٍ وَّالرَّسُوْلُ يَدْعُوْكُمْ فِيْٓ اُخْرٰىكُمْ فَاَثَابَكُمْ غَمًّا ۢبِغَمٍّ لِّكَيْلَا تَحْزَنُوْا عَلٰى مَا فَاتَكُمْ وَلَا مَآ اَصَابَكُمْ ۗ وَاللّٰهُ خَبِيْرٌ ۢبِمَا تَعْمَلُوْنَ
iż tuṣ‘idūna wa lā talwūna ‘alā aḥadiw war-rasūlu yad‘ūkum fī ukhrākum fa aṡābakum gammam bigammil likailā taḥzanū ‘alā mā fātakum wa lā mā aṣābakum, wallāhu khabīrum bimā taṣna‘ūn(a).
(याद करो) जब तुम भागे और किसी की ओर नहीं मुड़े, जबकि रसूल (मुहम्मद) तुम में से दूसरों के बीच तुम्हें पुकार रहा था, तो अल्लाह ने तुम पर एक के बाद एक गम थोपा, ताकि तुम उस चीज के लिए उदास न हो जो तुमसे छूट गई और जो तुम पर आ पड़ी। और अल्लाह तुम्हारे कर्मों से अच्छी तरह वाकिफ है।