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Q.S अल-अनफल (8:43)
اِذْ يُرِيْكَهُمُ اللّٰهُ فِيْ مَنَامِكَ قَلِيْلًاۗ وَلَوْ اَرٰىكَهُمْ كَثِيْرًا لَّفَشِلْتُمْ وَلَتَنَازَعْتُمْ فِى الْاَمْرِ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ سَلَّمَۗ اِنَّهٗ عَلِيْمٌۢ بِذَاتِ الصُّدُوْرِ
iż yurīkahumullāhu fī manāmika qalīlā(n), wa lau arākahum kaṡīral lafasyiltum wa latanāza‘tum fil-amri wa lākinnallāha sallam(a), innahū ‘alīmum biżātiṣ-ṣudūr(i).
(याद राखू) जखन अल्लाह हुनका सभ केँ अहाँक सपना मे (संख्या मे) देखौलनि तखन ओ सभ कम छलाह। आ जँ अल्लाह हुनका सभ केँ (बहुत संख्या मे) देखा देने रहितथि तँ अहाँ सभ डरि गेल रहितहुँ आ निश्चित रूप सँ अहाँ सभ एहि मामला पर बहस करितहुँ, मुदा अल्लाह अहाँ सभ केँ बचा लेलक अछि। सचमुच अल्लाह जनैत छथि जे अहाँक दिल मे की अछि।