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Q.S अल-मैदाह (5:19)
يٰٓاَهْلَ الْكِتٰبِ قَدْ جَاۤءَكُمْ رَسُوْلُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلٰى فَتْرَةٍ مِّنَ الرُّسُلِ اَنْ تَقُوْلُوْا مَا جَاۤءَنَا مِنْۢ بَشِيْرٍ وَّلَا نَذِيْرٍۗ فَقَدْ جَاۤءَكُمْ بَشِيْرٌ وَّنَذِيْرٌ ۗوَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ ࣖ
yā ahlal-kitābi qad jā'akum rasūlunā yubayyinu lakum ‘alā fatratim minar-rusuli an taqūlū mā jā'anā mim basyīriw wa lā nażīr(in), faqad jā'akum basyīruw wa nażīr(un), wallāhu ‘alā kulli syai'in qadīr(un).
ऐ अहल-ए-किताब! हमारे रसूल तुम्हारे पास आए हैं, जो तुम्हें (हमारा शरीयत) समझाते हैं, जब रसूलों का सिलसिला रुक गया था, ताकि तुम न कहो, 'हमारे पास न कोई खुशखबरी देने वाला आया और न चेतावनी देने वाला।' निश्चय ही, तुम्हारे पास खुशखबरी देने वाला और चेतावनी देने वाला आ चुका है। और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।