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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - हज हज के लिए आवश्यकताओं में से एक इसे करने में सक्षम होना है

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कुल श्लोक : 1
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Q.S अली इमरान (3:97)

فِيْهِ اٰيٰتٌۢ بَيِّنٰتٌ مَّقَامُ اِبْرٰهِيْمَ ەۚ وَمَنْ دَخَلَهٗ كَانَ اٰمِنًا ۗ وَلِلّٰهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ اِلَيْهِ سَبِيْلًا ۗ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعٰلَمِيْنَ

fīhi āyātum bayyinātum maqāmu ibrāhīm(a), wa man dakhalahū kāna āminā(n), wa lillāhi ‘alan-nāsi ḥijjul-baiti manistaṭā‘a ilaihi sabīlā(n), wa man kafara fa innallāha ganiyyun ‘anil-‘ālamīn(a).

वहाँ साफ-साफ निशानियाँ हैं, (उनमें से) मकाम-ए-इब्राहीम है। जो कोई उसमें (बैतुल्लाह में) दाखिल होता है, वह अमन में होता है। और अल्लाह के लिए लोगों पर उस घर (बैतुल्लाह) का हज करना ज़िम्मेदारी है, जो लोग वहाँ की यात्रा करने की सामर्थ्य रखते हैं। जो कोई हज की (ज़िम्मेदारी) का इंकार करता है, तो जान लो कि अल्लाह सारे जहान से बेनियाज़ है।