يَسْـَٔلُوْنَكَ مَاذَآ اُحِلَّ لَهُمْۗ قُلْ اُحِلَّ لَكُمُ الطَّيِّبٰتُۙ وَمَا عَلَّمْتُمْ مِّنَ الْجَوَارِحِ مُكَلِّبِيْنَ تُعَلِّمُوْنَهُنَّ مِمَّا عَلَّمَكُمُ اللّٰهُ فَكُلُوْا مِمَّآ اَمْسَكْنَ عَلَيْكُمْ وَاذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهِ ۖوَاتَّقُوا اللّٰهَ ۗاِنَّ اللّٰهَ سَرِيْعُ الْحِسَابِ
yas'alūnaka māżā uḥilla lahum, qul uḥilla lakumuṭ-ṭayyibāt(u), wa mā ‘allamtum minal-jawāriḥi mukallibīna tu‘allimūnahunna mimmā ‘allamakumullāhu fa kulū mimmā amsakna ‘alaikum ważkurusmallāhi ‘alaih(i), wattaqullāh(a), innallāha sarī‘ul-ḥisāb(i).
ओ सभ अहाँ (मुहम्मद) सँ पूछैत छथि जे "हुनका सभक लेल की जायज अछि?" कहब, "जे अहाँक लेल जायज अछि (ओ) नीक भोजन आ (खेल पकड़ल गेल) जानवरक शिकार करब जे अहाँ शिकार करबाक प्रशिक्षित केने छी, जकरा अहाँ अल्लाह द्वारा सिखाओल गेल अछि, ओहि हिसाब सँ प्रशिक्षित केने छी। तेँ जे पकड़ैत अछि से अहाँ सभक लेल खाउ, आ (जखन ओकरा छोड़ैत अछि) अल्लाह केर नाम लिअ। आ अल्लाह सँ डरू, सचमुच, अल्लाह अपन हिसाब मे बहुत जल्दी छथि।"
اُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ الْبَحْرِ وَطَعَامُهٗ مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِ ۚوَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ الْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًا ۗوَاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذِيْٓ اِلَيْهِ تُحْشَرُوْنَ
uḥilla lakum ṣaidul-baḥri wa ṭa‘āmuhū matā‘al lakum wa lis-sayyārah(ti), wa ḥurrima ‘alaikum ṣaidul-barri mā dumtum ḥurumā(n), wattaqullāhal-lażī ilaihi tuḥsyarūn(a).
समुद्री जानवर आ समुद्र सं (उत्पन्न) भोजनक शिकार करब अहाँक लेल, आ यात्रा करयवला लोकनिक लेल स्वादिष्ट भोजनक रूप मे करब जायज अछि; आ अहाँ सभक लेल जमीनक जानवर (पकड़ब) मना अछि, जाबत धरि अहाँ इहराम मे छी। आ अल्लाह सँ डरू जिनका लग अहाँ सभ (पुनः) जमा भ’ जायब।