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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Hukum umum atau sipil Zhihar (menyerupakan istri dengan ibunya) Sebab turunnya ayat zhihar

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कुल आयत : 4
1
Q.S अल-मुजादिलाह (58:1)

قَدْ سَمِعَ اللّٰهُ قَوْلَ الَّتِيْ تُجَادِلُكَ فِيْ زَوْجِهَا وَتَشْتَكِيْٓ اِلَى اللّٰهِ ۖوَاللّٰهُ يَسْمَعُ تَحَاوُرَكُمَاۗ اِنَّ اللّٰهَ سَمِيْعٌۢ بَصِيْرٌ

qad sami‘allāhu qaulal-latī tujādiluka fī zaujihā wa tasytakī ilallāh(i), wallāhu yasma‘u taḥāwurakumā, innallāha samī‘um baṣīr(un).

सचमुच, अल्लाह ओहि महिला के बात सुनने छथि जे अहाँ (मुहम्मद) के खिलाफ अपन पति के बारे में मुकदमा दायर केने छलीह, आ (मामला) अल्लाह सं शिकायत केने छलीह, आ अल्लाह अहाँ दुनू के बीच के गप्प सुनने छलाह. सचमुच अल्लाह सर्वश्रवण, सब देखनिहार छथि।


2
Q.S अल-मुजादिलाह (58:2)

اَلَّذِيْنَ يُظٰهِرُوْنَ مِنْكُمْ مِّنْ نِّسَاۤىِٕهِمْ مَّا هُنَّ اُمَّهٰتِهِمْۗ اِنْ اُمَّهٰتُهُمْ اِلَّا الّٰۤـِٔيْ وَلَدْنَهُمْۗ وَاِنَّهُمْ لَيَقُوْلُوْنَ مُنْكَرًا مِّنَ الْقَوْلِ وَزُوْرًاۗ وَاِنَّ اللّٰهَ لَعَفُوٌّ غَفُوْرٌ

allażīna yuẓāhirūna minkum min nisā'ihim mā hunna ummahātihim, in ummahātuhum illal-lā'ī waladnahum, wa innahum layaqūlūna munkaram minal-qauli wa zūrā(n), wa innallāha la‘afuwwun gafūr(un).

अहाँ सभ मे जे अपन पत्नीक लेल जिहार करैत छथि, (अपन पत्नी केँ अपन माय मानैत छथि, मुदा) हुनकर पत्नी हुनकर माय नहि छथि | हुनकर माय त बस ओ महिला छथि जे हुनका सब के जन्म देलखिन। आ सत्ते ओ सभ सत्ते एकटा एहन शब्द बाजल छथि जे गलत आ झूठ अछि। आ सचमुच अल्लाह क्षमाशील, परम क्षमाशील छथि।


3
Q.S अल-मुजादिलाह (58:3)

وَالَّذِيْنَ يُظٰهِرُوْنَ مِنْ نِّسَاۤىِٕهِمْ ثُمَّ يَعُوْدُوْنَ لِمَا قَالُوْا فَتَحْرِيْرُ رَقَبَةٍ مِّنْ قَبْلِ اَنْ يَّتَمَاۤسَّاۗ ذٰلِكُمْ تُوْعَظُوْنَ بِهٖۗ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُوْنَ خَبِيْرٌ

wal-lażīna yuẓāhirūna min nisā'ihim ṡumma ya‘ūdūna limā qālū fa taḥrīru raqabatim min qabli ay yatamāssā, żālikum tū‘aẓūna bih(ī), wallāhu bimā ta‘malūna khabīr(un).

आ जे अपन पत्नी पर जिहार करैत छथि, तखन जे कहने छथि से वापस ल' लैत छथि, तखन (ओकरा सभ केँ) पति-पत्नी दुनूक मिश्रण सँ पहिने एकटा दास केँ मुक्त करबाक चाही। ई अहाँ के सिखाओल गेल छल, आ अल्लाह अहाँ के जे काज करैत छी ताहि मे सावधान रहैत छथि।


4
Q.S अल-मुजादिलाह (58:4)

فَمَنْ لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَّتَمَاۤسَّاۗ فَمَنْ لَّمْ يَسْتَطِعْ فَاِطْعَامُ سِتِّيْنَ مِسْكِيْنًاۗ ذٰلِكَ لِتُؤْمِنُوْا بِاللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖۗ وَتِلْكَ حُدُوْدُ اللّٰهِ ۗوَلِلْكٰفِرِيْنَ عَذَابٌ اَلِيْمٌ

famal lam yajid faṣiyāmu syahraini mutatābi‘aini min qabli ay yatamāssā, famal lam yastaṭi‘ fa iṭ‘āmu sittīna miskīnā(n), żālika litu'minū billāhi wa rasūlih(ī), wa tilka ḥudūdullāh(i), wa lil-kāfirīna ‘ażābun alīm(un).

तेँ जे (अपन दास केँ मुक्त) नहि क' सकैत अछि, तखन (ओकरा) दुनूक मिश्रण सँ पहिने लगातार दू मास धरि उपवास करबाक चाही। मुदा जकर सामर्थ्य नहि छैक, तखन साठि गरीब लोक केँ खुआबय (अवश्य)। अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह पर अहाँ सब एहि तरहे विश्वास करैत छी। ई सब अल्लाह के नियम छै, आरू जे एकरऽ अवहेलना करतै ओकरा बहुत कष्टदायक सजा मिलतै ।