وَلَقَدْ اٰتَيْنَا لُقْمٰنَ الْحِكْمَةَ اَنِ اشْكُرْ لِلّٰهِ ۗوَمَنْ يَّشْكُرْ فَاِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهٖۚ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ حَمِيْدٌ
wa laqad ātainā luqmānal-ḥikmata anisykur lillāh(i), wa may yasykur fa'innamā yasykuru linafsih(ī), wa man kafara fa'innallāha ganiyyun ḥamīd(un).
आ साँचहू हमनी के लुकमान के बुद्धि देले बानी जा, माने कि "अल्लाह के शुक्रगुजार रहीं! आ जे (अल्लाह) के शुक्रगुजार होखे, त साँचहू ऊ अपना खातिर शुक्रगुजार होला; आ जे आभारी (बदनाम) ना होखे, त साँचहू अल्लाह सबसे अमीर, सबसे तारीफ हउवें."
وَاِذْ قَالَ لُقْمٰنُ لِابْنِهٖ وَهُوَ يَعِظُهٗ يٰبُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللّٰهِ ۗاِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيْمٌ
wa iż qāla luqmānu libnihī wa huwa ya‘iẓuhū yā bunayya lā tusyrik billāh(i), innasy-syirka laẓulmun ‘aẓīm(un).
आ (याद राखीं) जब लुकमान अपना बेटा से कहले रहले, जब ऊ ओकरा के एगो सबक सिखवले रहले कि, "हे हमार बेटा! अल्लाह के साथी मत करीं, वाकई में (अल्लाह) से साझीदार बनावल वाकई में बहुत बड़ अन्याय बा।"