وَاِذَا كُنْتَ فِيْهِمْ فَاَقَمْتَ لَهُمُ الصَّلٰوةَ فَلْتَقُمْ طَاۤىِٕفَةٌ مِّنْهُمْ مَّعَكَ وَلْيَأْخُذُوْٓا اَسْلِحَتَهُمْ ۗ فَاِذَا سَجَدُوْا فَلْيَكُوْنُوْا مِنْ وَّرَاۤىِٕكُمْۖ وَلْتَأْتِ طَاۤىِٕفَةٌ اُخْرٰى لَمْ يُصَلُّوْا فَلْيُصَلُّوْا مَعَكَ وَلْيَأْخُذُوْا حِذْرَهُمْ وَاَسْلِحَتَهُمْ ۚ وَدَّ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا لَوْ تَغْفُلُوْنَ عَنْ اَسْلِحَتِكُمْ وَاَمْتِعَتِكُمْ فَيَمِيْلُوْنَ عَلَيْكُمْ مَّيْلَةً وَّاحِدَةً ۗوَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ اِنْ كَانَ بِكُمْ اَذًى مِّنْ مَّطَرٍ اَوْ كُنْتُمْ مَّرْضٰٓى اَنْ تَضَعُوْٓا اَسْلِحَتَكُمْ وَخُذُوْا حِذْرَكُمْ ۗ اِنَّ اللّٰهَ اَعَدَّ لِلْكٰفِرِيْنَ عَذَابًا مُّهِيْنًا
wa iżā kunta fīhim fa aqamta lahumuṣ-ṣalāta faltaqum ṭā'ifatum minhum ma‘aka walya'khużū asliḥatahum, fa iżā sajadū falyakūnū miw warā'ikum, walta'ti ṭā'ifatun ukhrā lam yuṣallū falyuṣallū ma‘aka walya'khużū ḥiżrahum wa asliḥatahum, waddal-lażīna kafarū lau tagfulūna ‘an asliḥatakum wa amti‘atikum, fa yamīlūna ‘alaikum mailataw wāḥidah(tan), wa lā junāḥa ‘alaikum in kāna bikum ażam mim maṭarin au kuntum marḍā an taḍa‘ū asliḥatakum wa khużū ḥiżrakum, innallāha a‘adda lil-kāfirīna ‘ażābam muhīnā(n).
आ जँ अहाँ (मुहम्मद) हुनका सभक (अपन मित्र) मे छी आ अहाँ हुनका सभक संग नमाज पढ़य चाहैत छी, तखन हुनका सभक एकटा समूह केँ अहाँक संग ठाढ़ (नमाज) करय दियौक आ अपन हथियार उठाबय दियौक, तखन जखन ओ सभ (जे अहाँ सभक संग नमाज पढ़ैत छथि) सजदा करथि (एक रकाअत पूरा कए लेताह), तखन हुनका सभ केँ अहाँक पाछू सँ आगू बढ़य दियौक (शत्रु केर सामना करबाक लेल) आ दोसर समूह केँ आबय दियौक जे नमाज नहि केने अछि, तखन ओ सभ अहाँ सभक संग नमाज पढ़य दियौक, आ ओकरा सभ केँ तैयारी करय दियौक। सतर्क भ गेल आ अपन हथियार के होलस्टर क देलक। काफिर सब चाहैत छल जे अहाँ अपन हथियार आ अपन सम्पत्ति के प्रति लापरवाह रहू, ताहि लेल ओ सब एकहि बेर अहाँ सब पर हमला क देलक। आ अहाँक लेल कोनो बात नहि जे अहाँ अपन हथियार राखि दियौक, जँ अहाँ बरखाक कारणेँ वा बीमार पड़ि गेल छी तँ, आ तैयार रहू। सचमुच अल्लाह काफिर के लेल एकटा अपमानजनक सजा तैयार केने छथि।