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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - पिछले राष्ट्र जीव घटना का प्रारम्भ भगवान की कृपा से राक्षसों का निष्कासन न्याय के दिन तक शैतान को भगाने और उसका अभिशाप

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कुल श्लोक : 17
38
Q.S अल Baqarah (2:38)

قُلْنَا اهْبِطُوْا مِنْهَا جَمِيْعًا ۚ فَاِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ مِّنِّيْ هُدًى فَمَنْ تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُوْنَ

qulnahbiṭū minhā jamī‘ā(n), fa'immā ya'tiyannakum minnī hudan faman tabi‘a hudāya falā khaufun ‘alaihim wa lā hum yaḥzanūn(a).

हमने कहा, 'तुम सब यहाँ से नीचे उतरो। फिर जब तुम्हें मेरी ओर से कोई हिदायत आए, तो जो मेरी हिदायत का अनुसरण करेंगे, उन्हें न कोई डर होगा और न वे दुखी होंगे।'


118
Q.S एक-निसा (4:118)

لَّعَنَهُ اللّٰهُ ۘ وَقَالَ لَاَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيْبًا مَّفْرُوْضًاۙ

la‘anahullāh(u), wa qāla la'attakhiżanna min ‘ibādika naṣībam mafrūḍā(n).

जिसे अल्लाह ने लानत दी है। और उसने कहा, 'मैं निश्चित रूप से तेरे बन्दों में से एक निश्चित हिस्सा लूँगा।'


13
Q.S अल-आराफ़ (7:13)

قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا يَكُوْنُ لَكَ اَنْ تَتَكَبَّرَ فِيْهَا فَاخْرُجْ اِنَّكَ مِنَ الصّٰغِرِيْنَ

qāla fahbiṭ minhā famā yakūnu laka an tatakabbara fīhā fakhruj innaka minaṣ-ṣāgirīn(a).

(अल्लाह ने) कहा, 'तो उस (जन्नत) से उतर जाओ; क्योंकि तुम्हें इसमें घमंड करने का हक़ नहीं है। निकल जाओ! निश्चय ही तुम नीच लोगों में से हो।'


14
Q.S अल-आराफ़ (7:14)

قَالَ اَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ

qāla anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

(इब्लीस ने) कहा, 'मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब तक वे (लोग) दोबारा उठाए जाएँगे।'


15
Q.S अल-आराफ़ (7:15)

قَالَ اِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَ

qāla innaka minal-munẓarīn(a).

(अल्लाह ने) कहा, 'निश्चय ही, तुम उन लोगों में से हो जिन्हें मोहलत दी गई है।'


18
Q.S अल-आराफ़ (7:18)

قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُوْمًا مَّدْحُوْرًا ۗ لَمَنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَاَمْلَـَٔنَّ جَهَنَّمَ مِنْكُمْ اَجْمَعِيْنَ

qālakhruj minhā maż'ūmam madḥūrā(n), laman tabi‘aka minhum la'amla'anna jahannama minkum ajma‘īn(a).

(अल्लाह ने) कहा, 'यहाँ से निकल जाओ, अपमानित और निष्कासित होकर! जो भी उनमें से तेरा अनुसरण करेगा, मैं निश्चित रूप से तुम सबके साथ जहन्नम को भर दूँगा।'


34
Q.S अल-हिज्र (15:34)

قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَجِيْمٌۙ

qāla fakhruj minhā fa innaka rajīm(un).

उसने (अल्लाह ने) कहा, '(अगर ऐसा है) तो जन्नत से निकल जा, क्योंकि निश्चित रूप से तुम लानत किया गया है।'


35
Q.S अल-हिज्र (15:35)

وَّاِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ اِلٰى يَوْمِ الدِّيْنِ

wa inna ‘alaikal-la‘nata ilā yaumid-dīn(i).

'और निश्चित रूप से यह लानत तुझ पर क़ियामत के दिन तक रहेगी।'


36
Q.S अल-हिज्र (15:36)

قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ

qāla rabbi fa anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

उसने (इब्लीस ने) कहा, 'ऐ मेरे रब, (अगर ऐसा है) तो मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब (इंसान) उठाए जाएँ।'


37
Q.S अल-हिज्र (15:37)

قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَۙ

qāla fa innaka minal-munẓarīn(a).

अल्लाह ने कहा, '(ठीक है) तो निश्चित रूप से तुम उन लोगों में से हो जिन्हें मोहलत दी गई है।'


38
Q.S अल-हिज्र (15:38)

اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُوْمِ

ilā yaumil-waqtil-ma‘lūm(i).

'उस दिन तक जो तय किया गया है (क़ियामत)।'


63
Q.S अल-इसरा (17:63)

قَالَ اذْهَبْ فَمَنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ فَاِنَّ جَهَنَّمَ جَزَاۤؤُكُمْ جَزَاۤءً مَّوْفُوْرًا

qālażhab faman tabi‘aka minhum fa inna jahannama jazā'ukum jazā'am maufūrā(n).

(अल्लाह ने) कहा, 'जा, लेकिन जो कोई उनमें से तेरी पैरवी करेगा, तो निश्चित रूप से जहन्नम तुम सब का बदला होगी, एक पूरा बदला।'


77
Q.S दुखद (38:77)

قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَجِيْمٌۖ

qāla fakhruj minhā fa'innaka rajīm(un).

(अल्लाह ने) फरमाया, 'तो यहाँ से निकल जा! निश्चय ही, तुम लानती हो।'


78
Q.S दुखद (38:78)

وَّاِنَّ عَلَيْكَ لَعْنَتِيْٓ اِلٰى يَوْمِ الدِّيْنِ

wa inna ‘alaika la‘natī ilā yaumid-dīn(i).

और निश्चय ही, मेरी लानत तुझ पर बदस्तूर रहेगी जब तक कि हिसाब का दिन न आए।'


79
Q.S दुखद (38:79)

قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْنِيْٓ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ

qāla rabbi fa'anẓirnī ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

(इब्लीस ने) कहा, 'ऐ मेरे रब! मुझे उस दिन तक मोहलत दे जब वे (लोग) दोबारा उठाए जाएँगे।'


80
Q.S दुखद (38:80)

قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِيْنَۙ

qāla fa'innaka minal-munẓarīn(a).

(अल्लाह ने) फरमाया, 'तो निश्चय ही, तुम उन लोगों में से हो जिन्हें मोहलत दी गई है।'


81
Q.S दुखद (38:81)

اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُوْمِ

ilā yaumil-waqtil-ma‘lūm(i).

उस दिन तक जो वक्त मुकर्रर किया गया है (कियामत का दिन)।