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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - नैतिकता और शिष्टाचार नैतिकता और सामान्य अधिकार बोलने की नैतिकता सच कह रहा हूँ

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कुल श्लोक : 2
32
Q.S अल-अहज़ अब (33:32)

يٰنِسَاۤءَ النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَاَحَدٍ مِّنَ النِّسَاۤءِ اِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّذِيْ فِيْ قَلْبِهٖ مَرَضٌ وَّقُلْنَ قَوْلًا مَّعْرُوْفًاۚ

yā nisā'an-nabiyyi lastunna ka'aḥadim minan-nisā'i inittaqaitunna falā takhḍa‘na bil-qauli fa yaṭma‘al-lażī fī qalbihī maraḍuw wa qulna qaulam ma‘rūfā(n).

ऐ नबी की बीवियों! तुम दूसरी औरतों की तरह नहीं हो, अगर तुम तक़वा रखती हो। तो बात करने में नरमी न करो (आवाज़ को लचक न दो) ताकि वह शख्स जिसके दिल में बीमारी है, उसमें नफ्स जागे, और अच्छी बातें कहो।


70
Q.S अल-अहज़ अब (33:70)

يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَقُوْلُوْا قَوْلًا سَدِيْدًاۙ

yā ayyuhal-lażīna āmanuttaqullāha wa qūlū qaulan sadīdā(n).

ऐ ईमान वालों! अल्लाह से डरते रहो और सच्ची बात कहो,